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मंदीप सिंह का बड़ा धमाका—गढ़वाली के बाद अब हिंदी गानों में जलवा

द्वारीखाल/पौड़ी गढ़वाल। ब्लॉक द्वारीखाल के सिलोगी क्षेत्र अंतर्गत ग्राम बड़ेथ पट्टी ढाँगू निवासी युवा गायक मंदीप सिंह संगीत की पारंपरिक विरासत को नई पहचान दे रहे हैं। बचपन से ही संगीत के प्रति रुचि रखने वाले मंदीप को यह कला अपने परिवार से विरासत में मिली है।

बताया जाता है कि उनके दादाजी स्वर्गीय गब्बूदास भजन-कीर्तन की विधा में पारंगत थे और विशेष रूप से ब्रह्मानंद भजनमाला के भजनों के लिए जाने जाते थे। ढांगू पट्टी से लेकर सतपुली क्षेत्र तक लोग उनके भजनों के कायल रहे हैं। वहीं उनके पिता बलदेव सिंह हारमोनियम, ढोलक व गायकी में दक्ष हैं। उनके दोनों बड़े भाई भी संगीत में सक्रिय हैं। इस प्रकार परिवार की कई पीढ़ियों से चली आ रही संगीत साधना आज भी निरंतर जारी है।

मंदीप सिंह ने वर्ष 2025 में आयोजित ‘उत्तराखंड आइडियल’ प्रतियोगिता का खिताब जीतकर क्षेत्र का नाम रोशन किया। इसके अलावा उनके कई गढ़वाली गीत भी रिलीज हो चुके हैं, जिनमें अपडू उत्तराखंड सजैल्या, तेरी मुखड़ी, डांडा धार्यूं, हमरी माया, भैरव नाथ जागर, गुरु निरंकार जागर एवं रोपणी का दिन शामिल हैं, जिन्हें श्रोताओं द्वारा सराहा गया है।

अब मंदीप सिंह हिंदी संगीत की ओर भी कदम बढ़ा रहे हैं। उनका नया गीत “कोई शाम.. (यूं भी तो हो जरा)” रिकॉर्ड हो चुका है, जो शीघ्र ही उनके यूट्यूब चैनल “Mandeep Singh Official” पर रिलीज किया जाएगा।

मंदीप सिंह का कहना है कि संगीत उनके लिए जुनून के साथ-साथ परिवार की पहचान भी है। वह गढ़वाली संस्कृति को आगे बढ़ाते हुए हिंदी संगीत जगत में भी अपनी अलग पहचान बनाना चाहते हैं।

उम्मीद है कि उनकी इस नई पारी को भी जनता का भरपूर सहयोग एवं आशीर्वाद मिलेगा।

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