वनाग्नि रोकथाम को लेकर प्रशासन सख्त, जनसहभागिता व त्वरित प्रतिक्रिया पर जोर
पौड़ी। जनपद में बढ़ती वनाग्नि की घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन ने व्यापक रणनीति तैयार की है। जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में वनाग्नि की रोकथाम, त्वरित नियंत्रण एवं प्रभावी प्रबंधन के लिए विभिन्न बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक में प्रभागीय वनाधिकारी ने जानकारी दी कि वनाग्नि की अधिकांश घटनाएं सिविल क्षेत्रों में सामने आ रही हैं। इस पर जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि वर्तमान मैनुअल रिपोर्टिंग व्यवस्था के स्थान पर 1 मई से फायर अलार्म सिस्टम के अनुरूप सटीक एवं समयबद्ध रिपोर्टिंग सुनिश्चित की जाए, ताकि त्वरित कार्रवाई संभव हो सके।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि जानबूझकर आग लगाने वाले व्यक्तियों को चिन्हित कर उनके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही जनजागरूकता के माध्यम से लोगों को ऐसे कृत्यों से बचने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
उन्होंने संवेदनशील वन रेंज के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायतों के प्रधानों का न्याय पंचायत स्तर पर प्रशिक्षण आयोजित करने के निर्देश दिए। प्रशिक्षण क्रू स्टेशनों के सहयोग से कराया जाएगा तथा आवश्यक अग्निशमन उपकरण भी उपलब्ध कराए जाएंगे।
जिलाधिकारी ने निर्देशित किया कि प्रत्येक ग्राम पंचायत में टोल-फ्री नंबर 1926 का प्रदर्शन अनिवार्य रूप से किया जाए, ताकि वनाग्नि की सूचना तत्काल संबंधित विभाग तक पहुंच सके। इसके साथ ही ग्राम प्रधानों के साथ व्हाट्सएप समूह बनाकर सूचना तंत्र को और सुदृढ़ करने के निर्देश दिए गए।
पेयजल स्रोतों और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए पीरूल (चीड़ की पत्तियों) के संग्रहण के लिए संबंधित संस्थाओं के साथ एमओयू करने के निर्देश भी दिए गए। साथ ही डीएफओ लैंसडाउन को मानक संचालन प्रक्रिया का व्यापक प्रचार-प्रसार करने को कहा गया।
जिलाधिकारी ने सभी उपजिलाधिकारियों को निर्देशित किया कि वे एक सप्ताह के भीतर तहसील स्तर पर समन्वय बैठक आयोजित करें, जिसमें संबंधित विभागों के अधिकारी एवं जनप्रतिनिधि शामिल हों।
वन विभाग द्वारा एक सप्ताह के भीतर रियल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित करने की जानकारी भी दी गई, जिससे वनाग्नि की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित किया जा सकेगा।
बैठक में महातिम यादव, पवन नेगी, दीक्षिता जोशी, मनविंदर कौर सहित अन्य अधिकारी उपस्थित
