परमार्थ निकेतन में दुर्गा अष्टमी पर विशेष हवन, विश्व शांति और नारी सम्मान का संदेश
ऋषिकेश। दुर्गा अष्टमी के पावन अवसर पर परमार्थ निकेतन में आध्यात्मिक वातावरण के बीच विशेष हवन का आयोजन कर विश्व शांति और मानव कल्याण की प्रार्थना की गई। माँ गंगा के तट पर स्थित आश्रम में श्रद्धालुओं ने भक्ति और आस्था के साथ पूजा-अर्चना की।
इस अवसर पर पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि दुर्गा अष्टमी शक्ति, श्रद्धा और आत्मजागरण का पर्व है, जो हमें अपने भीतर स्थित दिव्य शक्ति को पहचानने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि माँ दुर्गा के नौ रूप हमें यह संदेश देते हैं कि जीवन के हर संघर्ष को हम अपनी आंतरिक शक्ति और संकल्प से जीत सकते हैं।

उन्होंने बताया कि अष्टमी का दिन विशेष रूप से माँ महागौरी की उपासना का दिन है, जो पवित्रता, शांति और करुणा का प्रतीक हैं। उनके आशीर्वाद से जीवन में सकारात्मकता और आत्मिक शुद्धता का संचार होता है।
स्वामी जी ने कहा कि नवरात्रि केवल बाहरी अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और आंतरिक शुद्धि का पर्व है। सच्ची भक्ति वही है, जो हमारे व्यवहार, वाणी और कर्मों में झलके। उन्होंने समाज में नारी सम्मान, सुरक्षा और सशक्तिकरण को जीवन का स्थायी संकल्प बनाने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि हमारे भीतर की नकारात्मकता, भय, क्रोध और अहंकार ही हमारे वास्तविक शत्रु हैं, जिनका नाश कर हम अपने जीवन को सत्य, प्रेम और शांति से भर सकते हैं।
इस दौरान आश्रम में कन्या पूजन भी किया गया और सभी श्रद्धालुओं ने समाज, राष्ट्र एवं मानवता के कल्याण के लिए सेवा, साधना और संस्कार को अपनाने का संकल्प लिया।
