उत्तराखंड

परमार्थ निकेतन में आध्यात्मिक विभूतियों का संगम, गंगा आरती में उमड़ा श्रद्धा का सागर

ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन में शुक्रवार को आध्यात्मिक चेतना, सांस्कृतिक गरिमा और सनातन परम्परा का अद्भुत संगम देखने को मिला। विश्वविख्यात आध्यात्मिक गुरू श्री श्री रविशंकर जी एवं सुप्रसिद्ध कथावाचिका जया किशोरी जी ने अपनी पावन उपस्थिति से इस तपोभूमि को अलंकृत किया।

माँ गंगा के पावन तट पर आयोजित विश्वप्रसिद्ध परमार्थ गंगा आरती में पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी एवं डॉ. साध्वी भगवती सरस्वती जी के सान्निध्य में दोनों विभूतियों की उपस्थिति श्रद्धालुओं के लिए भावविभोर करने वाला और अविस्मरणीय अनुभव रही।

इस अवसर पर स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी और साध्वी भगवती सरस्वती जी ने आत्मीयता के साथ श्री श्री रविशंकर जी एवं जया किशोरी जी को रुद्राक्ष का पौधा भेंट कर सम्मानित किया।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि भारत की सनातन संस्कृति ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना से ओतप्रोत है। महान संतों का एक मंच पर संगम वैश्विक चेतना को जागृत करता है और समाज को नई दिशा देता है।

डॉ. साध्वी भगवती सरस्वती जी ने कहा कि परमार्थ गंगा तट पर संतों का संगम केवल दृश्य नहीं, बल्कि एक दिव्य अनुभूति है, जो मन को शांति और हृदय को भक्ति से भर देता है। उन्होंने जीवन को आध्यात्मिक यात्रा बताते हुए आत्मिक उन्नति और विश्व कल्याण पर बल दिया।

श्री श्री रविशंकर जी ने कहा कि परमार्थ गंगा आरती प्रेम, सेवा, करुणा और एकता का जीवंत उदाहरण है। उन्होंने युवाओं से आध्यात्मिक मूल्यों को अपनाने, प्रकृति संरक्षण और सेवा के मार्ग पर चलने का आह्वान किया।

जया किशोरी जी ने परमार्थ निकेतन और गंगा तट को अपना आध्यात्मिक घर बताते हुए कहा कि यहां आकर उन्हें विशेष शांति और ऊर्जा का अनुभव होता है।

गंगा आरती में उपस्थित श्रद्धालुओं ने इस दिव्य संगम का साक्षी बनकर स्वयं को धन्य महसूस किया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *