अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव के चौथे दिन आयुर्वेद, चक्र और नाड़ी ज्ञान पर विशेष सत्र, गंगा तट पर संगीत से झूमे योग साधक
ऋषिकेश। इण्टर नेशनल योग फेस्टिवल के चौथे दिन योग, आयुर्वेद, चक्रों और नाड़ी ज्ञान को समर्पित विविध सत्रों का आयोजन किया गया। परमार्थ निकेतन में आयोजित यह महोत्सव आयुष मंत्रालय तथा पर्यटन मंत्रालय, भारत सरकार के “अतुल्य भारत पर्यटन अभियान” के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है।

महोत्सव में पूरे सप्ताह 80 से अधिक देशों के प्रतिभागी, 33 देशों के विद्यार्थी और लगभग 15–20 देशों के राजदूत, उच्चायुक्त और राजनयिक भाग ले रहे हैं। चौथे दिन लगभग 80 देशों से आए 1500 से अधिक योग साधकों और प्रतिभागियों ने भारत की प्राचीन चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद के बारे में विशेषज्ञों से गहन जानकारी प्राप्त की।
दिन की शुरुआत मां गंगा के पावन तट पर सनराइज चैंटिंग के साथ हुई, जिसमें योगाचार्य सुधांशु शर्मा के साथ साधकों ने ध्यान और मंत्रोच्चार का अनुभव किया। योगाचार्य डॉ. इन्दु शर्मा ने क्रिया योग तथा डॉ. रुचि गुलाटी ने प्राणायाम तकनीकों का अभ्यास कराया। योगाचार्य साध्वी आभा सरस्वती ने योग निद्रा सत्र के माध्यम से प्रतिभागियों को गहन विश्राम और आंतरिक जागरूकता का अनुभव कराया।
“विजडम टॉक्स” आध्यात्मिक संगोष्ठी में “आयुर्वेद – समग्रता का संतुलन, समन्वय और योगिक जीवन के माध्यम से स्वास्थ्य” विषय पर चर्चा हुई। इस सत्र में डॉ. रामकुमार, डॉ. कृष्णा पंकज नरम और मारिया अलेजांद्रा अवचारियन ने अपने विचार साझा किए, जबकि संचालन पाउला तापिया ने किया। वक्ताओं ने बताया कि आयुर्वेद प्रकृति के साथ सामंजस्य में जीवन जीने का कालातीत दर्शन है, जो शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक कल्याण को विकसित करता है।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि आयुर्वेद सनातन संस्कृति की अमूल्य धरोहर है, जो हमें प्रकृति के साथ संतुलित जीवन जीने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि शुद्ध आहार, संतुलित दिनचर्या और सकारात्मक विचार ही वास्तविक स्वास्थ्य और दीर्घायु का आधार हैं।
वहीं स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि वर्तमान समय में पूरे विश्व को योग और आयुर्वेद की सबसे अधिक आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि योग शरीर, मन और आत्मा को संतुलन में लाकर आंतरिक शांति प्रदान करता है, जबकि आयुर्वेद प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित कर स्वस्थ जीवन का मार्ग दिखाता है।
दिनभर आयोजित सत्रों में चक्र ज्ञान, ऊर्जा विज्ञान, नाड़ी योग, कुंडलिनी साधना और पतंजलि योगसूत्रों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। विभिन्न योगाचार्यों और विशेषज्ञों ने योग दर्शन, आंतरिक परिवर्तन और स्वस्थ जीवनशैली पर प्रतिभागियों को मार्गदर्शन दिया।
शाम को परमार्थ निकेतन की दिव्य गंगा आरती के पश्चात भारत के पहले जैमिंग बैंड की पहचान रखने वाली भाई-बहन की जोड़ी राघव और प्राची (बैकस्टेज सिब्लिंग्स) ने गंगा तट पर अद्भुत संगीत प्रस्तुति दी, जिसकी स्वर लहरियों पर योग साधक झूम उठे।
मुंबई से आई प्रतिभागी मित्तल ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि परमार्थ निकेतन में आकर नए लोगों से मिलना, आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त करना और मां गंगा की आरती में शामिल होना उनके लिए अत्यंत विशेष अनुभव रहा।
इस प्रकार अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव का चौथा दिन योग, आयुर्वेद, आध्यात्मिक ज्ञान और संगीत के अद्भुत संगम के साथ दिव्यता और ऊर्जा से परिपूर्ण रहा।
