ऋषिकेश में अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव का भव्य शुभारंभ, आचार्य बालकृष्ण की मौजूदगी में योग-आयुर्वेद का संदेश
ऋषिकेश। हिमालय की गोद में स्थित परमार्थ निकेतन में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव का विधिवत उद्घाटन आचार्य बालकृष्ण, पतंजलि योग पीठ के पावन सान्निध्य में हुआ। कार्यक्रम में विश्व के 80 से अधिक देशों से आए योग साधकों, योगाचार्यों और आध्यात्मिक गुरुओं ने भाग लेते हुए विश्व शांति के लिए प्रार्थना की।

महोत्सव में स्वामी चिदानन्द सरस्वती, साध्वी भगवती सरस्वती, विश्वप्रसिद्ध ड्रम वादक शिवमणि तथा प्रसिद्ध गायिका रूना रिजवी सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। सभी ने मिलकर योग और आध्यात्मिकता के माध्यम से विश्व शांति का संदेश दिया।
इस अवसर पर आचार्य बालकृष्ण ने योग जिज्ञासुओं को संबोधित करते हुए कहा कि आज दुनिया में अशांति दिखाई देती है, जबकि कोई भी व्यक्ति अशांति नहीं चाहता। उन्होंने कहा कि अशांति से शांति कभी उत्पन्न नहीं हो सकती, इसलिए ऐसे आध्यात्मिक महोत्सव अत्यंत महत्वपूर्ण हैं जो अशांति के बीच शांति स्थापित करने का प्रयास करते हैं। उन्होंने कहा कि योग ही वह शक्ति है जो विभिन्न देशों, संस्कृतियों और विचारों के लोगों को एक सूत्र में जोड़ती है।
उन्होंने योग और आयुर्वेद की प्राचीन भारतीय परंपरा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि स्वस्थ और संतुलित जीवन के लिए इन दोनों का समन्वय अत्यंत आवश्यक है। उनके प्रेरणादायक विचारों ने देश-विदेश से आए योग साधकों को भारतीय ज्ञान परंपरा की गहराई से परिचित कराया।
महोत्सव के प्रथम दिन सायं आयोजित गंगा आरती में ड्रम वादक शिवमणि की ऊर्जावान तालों और रूना रिजवी के मधुर गायन ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। “ॐ नमः शिवाय” के मंत्रोच्चार के साथ संगीत और योग का अद्भुत संगम देखने को मिला। देश-विदेश से आए योग साधक संगीत की लय पर झूम उठे और पूरे परिसर में उत्साह व आनंद का वातावरण बन गया।
इस अवसर पर स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने आचार्य बालकृष्ण का स्वागत करते हुए उन्हें रुद्राक्ष का दिव्य पौधा भेंट कर सम्मानित किया। योग, संगीत और आध्यात्मिकता से ओतप्रोत यह आयोजन सभी के लिए एक अविस्मरणीय अनुभव बना।
