नयार वैली एडवेंचर फेस्टिवल की सांस्कृतिक संध्या जागर सम्राट के नाम, लोकधुनों पर झूमी पूरी घाटी
पौड़ी/बिलखेत। नयार वैली एडवेंचर फेस्टिवल के दूसरे दिन की सांस्कृतिक संध्या लोकगायन की अनुपम छटा से सराबोर रही। कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई जागर सम्राट प्रीतम भरतवाण ने, जिनकी एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
जैसे ही उन्होंने “रुमा झूमा” जागर से कार्यक्रम का शुभारंभ किया, पांडाल में मौजूद दर्शक अपनी कुर्सियों पर ही झूम उठे। ढोल-दमाऊ की थाप और लोकधुनों की गूंज से पूरी नयार घाटी भाव-विभोर हो उठी।

इसके बाद उन्होंने “मेरु हिमवंती देश”, “सरुली मेरु जिया लगी गे”, “सभी कठ्ठा ह्वे गैनी” और “बिंदुली राति रै गे जरासी” जैसे लोकप्रिय लोकगीत प्रस्तुत किए। हर गीत पर तालियों की गड़गड़ाहट और दर्शकों का उत्साह देखते ही बनता था।
सांस्कृतिक संध्या के दौरान पांडाल खचाखच भरा रहा। यह आयोजन न केवल मनोरंजन का माध्यम बना, बल्कि नयार घाटी की लोकसंस्कृति, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत के गौरव को भी नई ऊंचाइयों तक ले गया।
