केवल सीबीआई जांच से नहीं मिलेगा पूर्ण न्याय, पीड़ित परिवार की एफआईआर व सुप्रीम कोर्ट निगरानी में हो जांच : मोहित डिमरी
देहरादून। अंकिता भंडारी हत्याकांड की जांच सीबीआई को सौंपे जाने को जनता के दबाव और लंबे आंदोलन की जीत बताते हुए अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच के सदस्य मोहित डिमरी ने कहा कि केवल सीबीआई जांच शुरू होना ही पूर्ण न्याय नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि न्याय तब ही पूरा माना जाएगा, जब इस जघन्य अपराध में शामिल सभी प्रभावशाली और ताकतवर लोग जेल की सलाखों के पीछे होंगे।

मोहित डिमरी ने सवाल उठाते हुए कहा कि सीबीआई जिस एफआईआर के आधार पर जांच कर रही है, वह अनिल प्रकाश जोशी द्वारा दर्ज कराई गई है, जिनका न तो अंकिता से कोई पारिवारिक संबंध है और न ही वे इस अपराध के प्रत्यक्षदर्शी हैं। उन्होंने कहा कि हत्या जैसे गंभीर मामले में पीड़ित परिवार को दरकिनार कर किसी तीसरे व्यक्ति की एफआईआर को आधार बनाना गंभीर सवाल खड़े करता है।
उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के उस सिद्धांत का हवाला दिया, जिसमें कहा गया है कि आपराधिक न्याय व्यवस्था में पीड़ित की आवाज़ को केंद्र में रखा जाना चाहिए, लेकिन इस मामले में अंकिता के माता-पिता की आवाज़ को जानबूझकर हाशिये पर धकेला गया है।
मोहित डिमरी ने एफआईआर में दर्ज “कुछ अज्ञात VIP व्यक्तियों” को लेकर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि जब पूरे उत्तराखंड में कथित रूप से दुष्यंत कुमार गौतम और अजय कुमार के नाम सामने आ चुके हैं, तो उन्हें अब तक अज्ञात क्यों रखा गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि VIP एंगल को जानबूझकर कमजोर किया गया है, जिससे कॉल डिटेल, मुलाकातों, दबाव और राजनीतिक संरक्षण की निष्पक्ष जांच प्रभावित हो सकती है।
उन्होंने यह भी कहा कि पूरी सीबीआई जांच पर सुप्रीम कोर्ट की कोई प्रत्यक्ष निगरानी नहीं है, जबकि यह मामला राज्य और केंद्र से जुड़े प्रभावशाली लोगों से संबंधित बताया जा रहा है। ऐसी स्थिति में बिना न्यायिक निगरानी के जनता का भरोसा बनना कठिन है।
अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच की ओर से मोहित डिमरी ने चार प्रमुख मांगें रखीं—
जांच अंकिता के माता-पिता द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर के आधार पर की जाए।
जिन लोगों के नाम VIP के रूप में सामने आए हैं, उन्हें जांच के दायरे में लिया जाए।
पूरी जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में कराई जाए।
मामले से जुड़े हर प्रभावशाली व्यक्ति पर बिना दबाव और भय के कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने कहा कि यह संघर्ष केवल अंकिता के लिए नहीं, बल्कि उत्तराखंड की बेटियों की सुरक्षा, न्याय और नैतिकता की लड़ाई है। इन सभी सवालों और मांगों को आगामी 8 फरवरी को देहरादून के परेड ग्राउंड में आयोजित महापंचायत में पूरी ताकत के साथ उठाया जाएगा।
