संविधान दिवस पर राष्ट्रीय चेतना, कर्तव्य और एकता का संदेश — परमार्थ निकेतन में आयोजित कार्यक्रम
ऋषिकेश। संविधान दिवस, राष्ट्रीय चेतना, कर्तव्य और एकता का महापर्व पर परमार्थ निकेतन में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें देश के प्रति समर्पण, संवैधानिक मूल्यों और कर्तव्यबोध का संदेश प्रमुखता से दिया गया। कार्यक्रम की शुरुआत 26/11 के शहीदों को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए हुई। उपस्थित जनों ने दो मिनट का मौन रखकर उन वीरों के साहस, बलिदान और राष्ट्रभक्ति को नमन किया।

संविधान दिवस के अवसर पर संविधान के शिल्पी, बाबा साहेब डॉ. भीमराव आम्बेडकर के राष्ट्र निर्माण में योगदान को भी भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी गई। वक्ताओं ने कहा कि बाबा साहेब की दृष्टि, परिश्रम और दूरदर्शिता ने भारतीय लोकतंत्र को एक मजबूत एवं समावेशी आधार प्रदान किया है।
कार्यक्रम में परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने हरियाणा से आए 200 से अधिक बच्चों को संबोधित किया। उन्होंने बताया कि आज की पीढ़ी को संविधान में निहित अधिकारों के साथ–साथ कर्तव्यों को भी समझने की आवश्यकता है।
उन्होंने प्रेरक संदेश देते हुए कहा, “संविधान ही है समाधान”, क्योंकि यही दस्तावेज राष्ट्र की प्रगति, एकता, न्याय और समानता को सुनिश्चित करता है।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने बच्चों से सद्भाव, स्वच्छता, सेवा, पर्यावरण संरक्षण तथा राष्ट्रीय एकता को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि संविधान दिवस केवल औपचारिकता नहीं बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों को आत्मसात करने का पावन अवसर है।
कार्यक्रम में आश्रम के संत, शिक्षकगण, बालक–बालिकाएँ एवं विभिन्न राज्यों से आए श्रद्धालु उपस्थित रहे।
— सूचना एवं लोक संपर्क विभाग
