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उत्तराखंड राज्य आंदोलन पर राजनीतिक बयानबाज़ी तेज़, आंदोलनकारियों के जख्म फिर हुए हरे

देहरादून। उत्तराखंड राज्य आंदोलन और उससे जुड़े राजनीतिक निर्णयों को लेकर एक बार फिर तिखी बयानबाज़ी सामने आई है। उत्तराखंड स्वाभिमान मोर्चा के महासचिव मोहित डिमरी ने कहा कि आंदोलनकारियों को आज भी याद है जब पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने उत्तराखंड आंदोलनकारियों को ‘अलगाववादी’ कहा था।

मोहित डिमरी ने यूकेडी के नवनियुक्त केंद्रीय अध्यक्ष एवं वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी सुरेंद्र कुकरेती का उदाहरण देते हुए कहा कि कुकरेती ने अटल बिहारी वाजपेयी की सभा में ‘‘माइक की तार काटकर’’ आंदोलन की आवाज उठाने का साहस दिखाया था। इसके बाद उन्हें पुलिस की लाठी, गिरफ्तारी और जेल की सजा भी झेलनी पड़ी थी।

डिमरी के अनुसार, “असली सवाल यह है कि जनता के जख्मों पर नमक किसने छिड़का?”

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड राज्य निर्माण को लेकर भाजपा अक्सर दावा करती है कि अटल बिहारी वाजपेयी ने यह राज्य बनाया, परन्तु यह सच्चाई नहीं है। “उत्तराखंड किसी की कृपा से नहीं मिला। यहां के लोगों ने संघर्ष किया, गोलियां खाईं, और अपना खून-पसीना बहाकर राज्य बनाया,” उन्होंने कहा।

डिमरी के मुताबिक, आंदोलन अपने चरम पर था तभी अटल बिहारी वाजपेयी का आंदोलनकारियों को ‘अलगाववादी’ कहना, उनके घावों पर नमक छिड़कने जैसा था।

उन्होंने आगे कहा कि दूसरा नमक छिड़कने का कार्य तब हुआ जब आंदोलनकारियों पर गोली चलवाने के लिए जिम्मेदार बताए जाने वाले तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ‘पद्म विभूषण’ सम्मान प्रदान किया गया।

डिमरी ने इसे भाजपा का “दोहरे चेहरे” का उदाहरण बताया और कहा कि पार्टी को उत्तराखंडवासियों के संघर्ष व बलिदान की कोई कद्र नहीं है।

आंदोलन से जुड़े अन्य लोगों ने भी कहा कि उत्तराखंड राज्य किसी राजनीतिक सौदे या नेता की उदारता से नहीं, बल्कि जन-संघर्ष और बलिदान की लड़ी से निर्मित हुआ है। उनका कहना है कि राज्य निर्माण का श्रेय लेने वालों को समझना चाहिए कि यह जन-संग्राम की जीत थी, न कि किसी राजनीतिक उपकार का परिणाम।

 

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