प्रयागराज

परमार्थ त्रिवेणी पुष्प आश्रम में क्रांतिकारी बटुकेश्वर दत्त की जयंती पर श्रद्धा-सुमन

प्रयागराज। परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी प्रयागराज प्रवास पर हैं। अरैल क्षेत्र स्थित नव–निर्मित परमार्थ त्रिवेणी पुष्प आश्रम में गुरुकुल के ऋषिकुमारों ने स्वामी जी के पावन सान्निध्य में अमर क्रांतिकारी, निर्भीक वीर और राष्ट्रनिष्ठ तपस्वी श्री बटुकेश्वर दत्त की जयंती पर विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की। स्वामी जी ने कहा कि बटुकेश्वर दत्त ने भारत माता की स्वतंत्रता के लिए अपना संपूर्ण जीवन, युवा शक्ति और अस्तित्व राष्ट्र–सेवा को समर्पित किया। उन्होंने कहा कि दत्त की रगों में स्वतंत्रता की ज्वाला प्रवाहित होती थी और उनका संकल्प केवल एक था—भारत माँ को आज़ाद कराना।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी अपने दो दिवसीय प्रयागराज प्रवास के उपरांत आज फुटपर्ती, बैंगलुरू के लिए प्रस्थान कर गए। फुटपर्ती में भारत के विश्वविख्यात संत, सत्य, प्रेम और सेवा के प्रतीक श्री सत्य साई बाबा जी के शताब्दी अवतरण महोत्सव का भव्य आयोजन चल रहा है, जिसमें स्वामी जी को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया है। यह आयोजन विश्वभर के संतों, अनुयायियों, विचारकों और भक्तों का अद्भुत संगम है। फुटपर्ती में आयोजित इस पावन उत्सव में कल 19 नवंबर को प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी भी उपस्थित होकर वैश्विक समुदाय को संबोधित करेंगे।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि बटुकेश्वर दत्त भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के उन महानायकों में से हैं जिनका योगदान सदैव स्वर्णाक्षरों में अंकित रहेगा। उन्होंने कहा कि जिस आयु में सामान्य युवा अपने भविष्य की योजनाएँ बनाते हैं, उस समय बटुकेश्वर दत्त ने अपना भविष्य राष्ट्र को समर्पित कर दिया। वे भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव जैसे बलिदानियों के सहयोगी थे और स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा देने वाले अग्रणी योद्धा थे।

स्वामी जी ने 8 अप्रैल 1929 के ऐतिहासिक दिन को याद करते हुए कहा कि जब भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने केंद्रीय विधान सभा में बम और पर्चे फेंककर अंग्रेजी शासन को सीधे चुनौती दी, तो उनका उद्देश्य हिंसा नहीं बल्कि अन्याय के विरुद्ध न्याय की गर्जना थी। उनकी गिरफ्तारी, जेल की यातनाएँ और अमानवीय परिस्थितियाँ भी उनके साहस और देशभक्ति को डिगा नहीं सकीं।

उन्होंने कहा कि बटुकेश्वर दत्त का पूरा जीवन युवाओं के लिए प्रेरणा है। उनका संदेश था कि देशप्रेम केवल विचार नहीं, जीवन का संकल्प है। वे कहा करते थे—“जो जीवन राष्ट्र के लिए नहीं जिया, वह व्यर्थ है।” यह संदेश न केवल प्रेरित करता है बल्कि युवा शक्ति के लिए जागरण का शंखनाद भी है।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपने वीरों की स्मृतियों को सम्मान दें, उन्हें जीवित रखें और आने वाली पीढ़ियों में राष्ट्रप्रेम की ज्योति प्रज्वलित करें—यही उन वीर बलिदानियों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *