परमार्थ संगम घाट पर दिव्य गंगा आरती, स्वामी चिदानन्द सरस्वती के सान्निध्य में छाया आध्यात्मिक वैभव
प्रयागराज। परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी के पावन सान्निध्य में आज परमार्थ संगम घाट, प्रयागराज पर भारतीय संस्कृति, वेदमंत्रों और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला। दिव्य गंगा आरती के दौरान वातावरण मंत्रोच्चार, दीपशिखाओं की ज्वाला और भजनों की सुरलहरियों से गूंज उठा, जिससे अरैल की पावन भूमि आध्यात्मिक प्रकाश से आलोकित हो उठी।

आरती के दौरान श्रद्धालुओं ने स्वयं को आध्यात्मिक रूप से जागृत, ऊर्जावान और भावविभोर महसूस किया। संगम तट की दिव्यता ने ऐसा वातावरण बनाया जैसे प्रकृति स्वयं देवत्व का उत्सव मना रही हो।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी का संदेश
पूज्य स्वामी जी ने कहा कि प्रयागराज भारत की आध्यात्मिक धड़कन और सनातन संस्कृति का शक्तिपीठ है।
उन्होंने कहा—
“यहाँ की हवा में अध्यात्म बसता है, जल में संस्कृति बहती है और भूमि पर सेवा की परंपरा जीवित रहती है।”
स्वामी जी ने उपस्थित जनों से आग्रह किया कि परमार्थ संगम घाट पर प्रतिदिन होने वाली संगम आरती में अधिक से अधिक संख्या में सहभागी बनें। उन्होंने कहा कि आरती केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि जीवन को पवित्र और सकारात्मक ऊर्जा से भरने का माध्यम है। इससे प्रयागराज के आध्यात्मिक पर्यटन को नई दिशा मिलने की बात भी उन्होंने कही।
उन्होंने आगे कहा—
“संगम वह स्थल है जहाँ तीन पवित्र नदियाँ मिलती हैं और साथ ही आस्था, अध्यात्म और एकता जैसी तीन पवित्र ऊर्जा भी प्रवाहित होती हैं। यही एकता आज विश्व के लिए सबसे अधिक आवश्यक है।”
पर्यावरण संरक्षण का संकल्प
आरती के समापन पर सभी श्रद्धालुओं ने पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता, जल संरक्षण और वृक्षारोपण के सामूहिक संकल्प लिए।
