ऋषिकेश

परमार्थ निकेतन में दीपोत्सव की भव्यता से गंगा तट आलोकित

विदेशों से आये भारतीय परिवारों ने मां गंगा के तट पर मनाया दीपावली पर्व

ऋषिकेश। दीपों का पर्व दीपावली अपनी उजास से पूरे देश ही नहीं, बल्कि विश्व के हर उस कोने को आलोकित कर रहा है, जहाँ भारतीय संस्कृति की ज्योति प्रज्वलित है। ऋषिकेश स्थित परमार्थ निकेतन आश्रम, जो भारतीय संस्कृति, परंपरा और अध्यात्म का जीवंत केन्द्र है, वहाँ आज दीपावली के अवसर पर गंगा तट पर भव्य व भावनाओं से परिपूर्ण दीपोत्सव का आयोजन किया गया।

विश्व के अनेक देशों से आए एनआरआई भारतीय परिवारों ने पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज के पावन सान्निध्य में मां गंगा के तट पर दीप प्रज्वलित कर दिव्यता और संस्कृति का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया।

पर्व के अवसर पर मां लक्ष्मी जी और भगवान श्री गणेश जी का वैदिक मंत्रोच्चार एवं विधि-विधान से पूजन किया गया। इस अवसर पर परमार्थ परिवार, देश-विदेश से आए श्रद्धालु एवं एनआरआई परिवारों ने स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी और साध्वी भगवती सरस्वती जी के सान्निध्य में दीप जलाकर राष्ट्र की समृद्धि, विश्व शांति और सर्व मंगल की कामना की।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा — दीपावली अपनी जड़ों से जुड़ने का पर्व है

पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने वैश्विक भारतीय परिवार को दीपावली की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि भारत की वास्तविक शक्ति उसकी संस्कृति, मूल्यों और संस्कारों में निहित है।

उन्होंने कहा कि हमारे एनआरआई भाई-बहनों ने विदेशों में रहकर भी भारतीय संस्कृति की सुगंध को संसार के कोने-कोने तक पहुँचाया है।

“परमार्थ निकेतन हमेशा से प्रवासी भारतीयों के लिए अपने घर जैसा है,” — स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी

स्वामी जी ने बताया कि प्रवासी भारतीयों ने विदेशों में भी अपनी संस्कृति को जीवंत बनाए रखा है। स्पेन में रहने वाले भारतीय परिवारों ने वहाँ नदियों के तटों और मंदिरों की स्थापना की है तथा हर माह एक बार गंगा आरती का आयोजन करते हैं, जो गौरव का विषय है।

उन्होंने कहा कि दीपावली केवल दीप जलाने का पर्व नहीं, बल्कि अपनी जड़ों, अपनी माटी और अपने संस्कारों से जुड़ने का अद्भुत माध्यम है। पर्वों को मनाने का उद्देश्य आने वाली पीढ़ियों को संस्कृति से जोड़ना है — यही दीपोत्सव का सच्चा संदेश है।

“परमार्थ निकेतन भावनाओं और प्रेम से बना एक परिवार है। यहां से हम अगली पीढ़ी को भारतीय संस्कार दे सकते हैं और सिखा सकते हैं कि विदेश में रहकर भी भारत कैसे दिल में बसता है।” — स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी

गंगा आरती और दीपों की ज्योति से आलोकित हुआ वातावरण

जैसे ही दिव्य और भव्य गंगा आरती का आरंभ हुआ, दीपों की अनगिनत ज्योतियों से गंगा तट आलोकित हो उठा। वातावरण श्रद्धा, भक्ति और एकता की तरंगों से भर गया। सभी श्रद्धालु भाव-विभोर होकर दीपावली की उजास में डूब गए।

साध्वी भगवती सरस्वती जी ने कहा — दीपावली भारतीयता का उत्सव है

साध्वी भगवती सरस्वती जी ने कहा कि भारतीय संस्कृति केवल शास्त्रों या पुस्तकों में नहीं, बल्कि लोगों के हृदयों में जीवित है। जब भारतीय परिवार विदेशों से लौटकर इस पवित्र भूमि पर दीपावली मनाते हैं, तो वे अपनी अगली पीढ़ी को ‘भारतीयता’ की अमूल्य विरासत सौंपते हैं।

“दीपावली अंधकार पर प्रकाश की विजय है — विविधता में एकता और संस्कृति का उज्ज्वल उत्सव।” — साध्वी भगवती सरस्वती जी

स्वदेशी दीपावली का संदेश

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने सभी को संदेश देते हुए कहा कि दीपावली दीयों वाली हो, स्वदेशी वाली हो, इसका विशेष ध्यान रखें।

पर्व को पर्यावरण, संस्कृति और स्वदेशी भावना के साथ मनाना ही सच्ची दीपावली है।

स्पेन से आए एनआरआई दल ने किया भंडारा

इस अवसर पर स्पेन से आए एनआरआई दल ने परमार्थ निकेतन परिसर में विशाल भंडारा आयोजित किया। स्वामी जी ने दल के सभी सदस्यों का अभिनंदन करते हुए कहा कि उन्होंने संस्कृति और संस्कारों के संरक्षण के साथ गंगा जी की ज्योति जलाए रखने का कार्य किया है, जो अत्यंत प्रेरणादायक है।

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