परमार्थ निकेतन में श्रीमद् भागवत कथा का दिव्य विश्राम, साधकों ने अनुभव किया आध्यात्मिक आनंद
ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा का आज दिव्य विश्राम हुआ। यह अवसर सभी आयोजकों और साधकों के लिए गहन आध्यात्मिक अनुभूति से भरा रहा। कथा का प्रवाह कथा व्यास श्री कनकेश्वरी देवी जी के श्रीमुख से निरंतर चलता रहा, जो आज विश्राम पर पहुँचा।
साधकों ने इस पावन ज्ञानधारा के विश्राम को एक नए अध्याय की शुरुआत के रूप में ग्रहण किया और प्रभु के प्रति अपनी श्रद्धा, भक्ति व सेवा भाव को और सुदृढ़ किया।
इस दिव्य अवसर पर परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी और साध्वी भगवती सरस्वती जी का पावन सान्निध्य एवं प्रेरक संदेश सभी को प्राप्त हुआ।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने आज विश्व खाद्य दिवस के अवसर पर सभी का ध्यान भोजन सुरक्षा की ओर आकर्षित करते हुए कहा कि –
“बेहतर भोजन और बेहतर भविष्य के लिए हमें हाथ में हाथ और दिल से दिल जोड़ना होगा।”
उन्होंने कहा कि जहाँ सहयोग, समानता और सम्मान होता है, वहीं भोजन और जीवन का वास्तविक पोषण होता है। भोजन केवल पेट भरने का साधन नहीं, बल्कि आत्मिक समृद्धि और समाज में न्याय की पहचान है। उन्होंने भोजन की बर्बादी रोकने, भंडारों और घरों में भोजन का सम्मान करने तथा जरूरतमंदों तक पौष्टिक भोजन पहुँचाने का आह्वान किया।
साध्वी भगवती सरस्वती जी ने कहा कि भोजन केवल भौतिक पोषण का माध्यम नहीं, बल्कि यह हमारी संस्कृति, परंपरा और धर्म का प्रतीक है। अन्न को माता समान मानते हुए हमें उसका सम्मान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में भोजन को अन्नपूर्णा माता कहा गया है और प्रत्येक थाली में संतुलन, कृतज्ञता और संयम होना चाहिए।

कथाव्यास श्री कनकेश्वरी देवी जी ने कहा कि परमार्थ निकेतन गंगा जी के पावन तट पर पूज्य स्वामी जी के सान्निध्य में कथा का श्रवण और गायन दोनों ही सौभाग्य की बात है। भागवत कथा जीवन को करुणा, सेवा और उच्चतम मूल्यों की ओर ले जाने वाला दिव्य मार्गदर्शन है।
उन्होंने साधकों से कहा कि गंगा के इस तट से केवल गंगा जल ही नहीं, बल्कि जीवन के मूल्यों को भी अपने घरों तक लेकर जाएँ और उन्हें अपने परिवार में रोपित करें।
कथा आयोजक श्रीमती करूणाबेन प्रागजी भाई पटेल, श्री प्रागजी भाई नारण भाई पटेल, विशाल, मितल, श्रेया, जैमिन, धरती, ईशान, निष्ठा, पिनाक एवं अहमदाबाद (गुजरात) से पधारे सभी परिवारजन भावविभोर होकर परमार्थ निकेतन से विदा हुए।
