संस्कृत हमारे डीएनए में है – गौरव शास्त्री
देहरादून। संस्कृतभारती देहरादूनम् द्वारा ‘गेहे-गेहे संस्कृतम्’ अभियान के अंतर्गत जनकल्याणन्यास, सुमननगर, धर्मपुर, देहरादून में संस्कृत सप्ताह समारोह का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम शाम 4:30 बजे दीप प्रज्ज्वलन और आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय हर्रावाला के छात्र-छात्राओं द्वारा सरस्वती वंदना से प्रारंभ हुआ।

संस्कृतभारती देहरादूनम् के जनपद मंत्री डॉ. प्रदीप सेमवाल ने अतिथि परिचय और स्वागत भाषण में संस्कृत को संस्कृति का जीवन-प्रवाह बताते हुए इसके प्रसार की आवश्यकता पर बल दिया। विशिष्ट अतिथि समाजसेवी एल.एल. पाल ने कहा कि संस्कृत केवल भाषा नहीं, बल्कि जीवन को नैतिक मूल्यों से समृद्ध करने का माध्यम है। सारस्वत अतिथि डॉ. नवीन जोशी ने विद्यार्थियों से संस्कृत को जीवनशैली के रूप में अपनाने का आह्वान किया।

मुख्य अतिथि एवं प्रांत संगठन मंत्री गौरव शास्त्री ने कहा कि ‘गेहे-गेहे संस्कृतम्’ अभियान का उद्देश्य प्रत्येक परिवार को संस्कृत संवाद का केंद्र बनाना है, जिससे सामाजिक एकता और सांस्कृतिक गौरव सुदृढ़ हो, क्योंकि “संस्कृत हमारे डीएनए में है”। अतिविशिष्ट अतिथि आचार्य विजेंद्र प्रसाद ममगाईं ने संस्कृत को सम्पूर्ण मानवता की साझा धरोहर बताया और ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ के संदेश को दोहराया।
अध्यक्षीय संबोधन में जिलाध्यक्ष डॉ. राम भूषण विजल्वाण ने संस्कृत संरक्षण और प्रचार के लिए समाज को एकजुट करने का आह्वान किया। कार्यक्रम का संचालन विशाल प्रसाद भट्ट ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. नवीन जसोला ने दिया।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में वैद्यकीय छात्रों द्वारा स्वागत गीत, श्रद्धा और वैष्णवी के नृत्य, तथा हिमालयीय चिकित्सा महाविद्यालय के छात्रों की नाट्य प्रस्तुति शामिल रही। कार्यक्रम में धराली आपदा के दिवंगतों को श्रद्धांजलि भी अर्पित की गई।
इस अवसर पर अनेक विद्वान, समाजसेवी, शिक्षा एवं चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े लोग उपस्थित रहे। समारोह ने संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में अपनी पहचान बनाई।
