उत्तराखंडदेहरादून

संस्कृत सप्ताह का हुआ भव्य शुभारंभ

उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय, हर्रावाला परिसर में विविध आयोजन

देहरादून। उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय, हर्रावाला के मुख्य परिसर में आज संस्कृत सप्ताह का शुभारंभ किया गया। संस्कृत दिवस के उपलक्ष में आयोजित इस कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन से हुई, जिसे उप परिसर निदेशक डॉ. नन्द कुमार दाधीच, डॉ. एस. पी. सिंह, डॉ. अमित तमादड्डी, डॉ. इला तन्ना, डॉ. प्रदीप सेमवाल एवं डॉ. ऋषि आर्य ने संयुक्त रूप से संपन्न किया।

कार्यक्रम का प्रारंभिक उद्बोधन डॉ. प्रदीप सेमवाल ने दिया। उन्होंने कहा कि “संस्कृत भारत की प्राण भाषा है, जो जीवन के प्रत्येक पहलू को सुशिक्षित करती है।” उन्होंने संस्कृत साहित्य को भारत के विश्वगुरु बनने का आधार बताया।

डॉ. राजीव कुरेले ने अपने संबोधन में कहा कि संस्कृत का उच्चारण मानसिक और आत्मिक ऊर्जा प्रदान करता है। संस्कृत साहित्य मानवीय मूल्यों का पोषण करता है। डॉ. अमित तमादड्डी ने कहा कि भाषा अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम है और संस्कृत सभी भाषाओं की जननी है।

डॉ. इला तन्ना ने संस्कृत को हमारी सांस्कृतिक धरोहर बताते हुए कहा कि इसका संरक्षण प्रत्येक घर में होना चाहिए। उन्होंने संस्कृत को जनभाषा बनाने का आह्वान करते हुए एक मधुर संस्कृत गीत भी प्रस्तुत किया।

अध्यक्षीय भाषण में डॉ. नन्द कुमार दाधीच ने कहा कि “संस्कृत ज्ञान एवं विज्ञान की भाषा है, जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के लिए भी उपयुक्त है।” उन्होंने संस्कारों से जोड़ने वाली इस भाषा को सीखने पर बल दिया।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय की छात्राओं द्वारा सरस्वती वंदना, संस्कृत गीत, नृत्य एवं नाटक प्रस्तुत किए गए। उल्लेखनीय प्रस्तुतियों में सृष्टि चौहान, आयुषी, खुशी सिंह, सिमरन, मेघा, प्रीति डिमरी, शैलजा द्वारा सरस्वती वंदना, माधवी, निदा, कमल, अमन, सत्यम, अभय, शिवा, विक्रम और सदान द्वारा धन्वंतरि वंदना, तथा प्रिया, गीता, चक्षु, अंशुल, आयुष और उवेश द्वारा स्वागत गीत सम्मिलित रहे।

खुशी पुरोहित, अंकिता लमगड़िया एवं दीक्षा बुडलाकोटी द्वारा प्रस्तुत संस्कृत गीत तथा महक, शिवांगी भारती, शिवांगी सिंघल व सादिया द्वारा सुभाषित गान को श्रोताओं ने सराहा। श्रद्धा द्वारा संस्कृत नृत्य और नौशीन मदीहा, तनीशा, प्रेरणा, एकता, भूमिका, ऋषभ एवं अक्षय द्वारा “पर्यावरणं रक्षत” नाटक का मंचन विशेष आकर्षण का केंद्र रहा।

कार्यक्रम का संचालन खुशी ढौंडियाल व दीक्षा ने किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के सभी विभागों के प्राध्यापक, छात्र एवं कर्मचारीगण उपस्थित रहे।

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