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उत्तरकाशी और पौड़ी की त्रासदी पर परमार्थ निकेतन ने व्यक्त की गहरी संवेदनाएं

“हमारा उत्तराखंड फिर खड़ा होगा” – स्वामी चिदानन्द सरस्वती

ऋषिकेश। उत्तरकाशी, धराली, पौड़ी जनपद के बुरांसी और बांकुड़ा गांवों में हाल ही में हुई भीषण अतिवृष्टि और भूस्खलन की आपदा ने पूरे प्रदेश सहित देश को गहरे शोक में डुबो दिया है। इस प्राकृतिक आपदा में कई लोगों की जान चली गई, सैकड़ों परिवार बेघर हो गए और अनेक गांवों में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने विदेश प्रवास से भेजे अपने संदेश में इस भीषण त्रासदी पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि

“उत्तराखंड की धरती केवल हिमालय की गोद नहीं, यह संकल्पों की जन्मभूमि है। यह वह देवभूमि है जहाँ पीड़ा को भी तपस्या की तरह सहा जाता है।”

स्वामी जी ने कहा कि यह समय पीड़ितों को अकेला छोड़ने का नहीं, बल्कि उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने का है। उन्होंने सभी नागरिकों, सेवाभावी संगठनों, श्रद्धालुओं एवं प्रवासी भारतीयों से उत्तराखंड के पुनर्निर्माण में सहयोग का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में भोजन, दवाइयाँ, कंबल, तिरपाल, वस्त्र एवं प्राथमिक चिकित्सा सेवाओं की भारी आवश्यकता है। केंद्र एवं राज्य सरकार, प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी, मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी जी तथा सेनाएं लगातार राहत कार्यों में जुटी हैं, लेकिन यह केवल सरकारी दायित्व नहीं, हर नागरिक का धर्म है।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा:

“हमारा उत्तराखंड फिर खड़ा होगा, क्योंकि इसकी आत्मा अडिग है, संस्कृति अजेय है और जड़ें हिमालय जितनी गहरी हैं।”

परमार्थ निकेतन में निरंतर सेवा

परमार्थ निकेतन में सेवा की परंपरा के अंतर्गत प्रत्येक दिन तीनों समय निराश्रितों, संतों एवं ज़रूरतमंदों के लिए भंडारे का आयोजन किया जा रहा है। एकजुट होकर बनें सच्चे उत्तराखंडी

स्वामी जी ने अंत में कहा –

“आज समय है कि हम धर्म, जाति, भाषा और सीमाओं से ऊपर उठकर एक उत्तराखंडी बनें। यही एकता और सेवा भावना ही इस त्रासदी में हमारा सबसे बड़ा बल बनेगी।”

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