राष्ट्रीय

श्रीराम जन्मभूमि भूमिपूजन दिवस: राष्ट्र की चेतना और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक

स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने दी शुभकामनाएं, कहा – श्रीराम जी के आदर्शों को जीवन में अपनाना ही सच्ची श्रद्धांजलि

ऋषिकेश। 05 अगस्त 2020 को अयोध्या में भगवान श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण हेतु भूमिपूजन संपन्न हुआ था। इस ऐतिहासिक घटना की पाँचवीं वर्षगाँठ के अवसर पर स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने इसे राष्ट्र के नव निर्माण और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक बताया।

स्वामी जी ने कहा कि यह तिथि केवल मंदिर निर्माण की शुरुआत नहीं, बल्कि भारतीय आत्मा, आस्था और सांस्कृतिक चेतना के जागरण का दिन है। श्रीराम जी का जीवन सत्य, सेवा, समरसता, त्याग और मर्यादा का आदर्श है, जिसे अपनाकर ही रामराज्य की कल्पना को साकार किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि जब प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के कर-कमलों से भूमिपूजन संपन्न हुआ था, वह केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि भारतीयता की विजय, न्याय की स्थापना और संघर्ष की पूर्णता का क्षण था।

स्वामी जी ने बताया कि यह मंदिर केवल ईंट-पत्थरों की संरचना नहीं, बल्कि एक राष्ट्र के आत्मबल, विश्वास और विवेक का सजीव स्वरूप है। भूमिपूजन दिवस भारत की बहुसांस्कृतिक विरासत, सहिष्णुता और लोकतंत्र की परिपक्वता का भी प्रतीक है।

उन्होंने यह भी कहा कि जब आज देश वैश्विक मंचों पर आगे बढ़ रहा है, तब यह आवश्यक है कि प्रगति भारतीय मूल्यों, संस्कृति और संवेदनशीलता से जुड़ी हो। रामराज्य केवल धार्मिक कल्पना नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, समानता, शुचिता और सेवा आधारित शासन का नाम है।

भूमिपूजन की यह वर्षगाँठ सभी नागरिकों को यह स्मरण दिलाती है कि राष्ट्र की शक्ति उसकी संस्कृति और चरित्र में होती है, न कि केवल सीमाओं और संसाधनों में।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *