अंतर्राष्ट्रीय मित्रता दिवस 2025: प्रकृति संग सेतु निर्माण का आह्वान
“जब हम पौधे लगाते हैं, तो धरती से मित्रता का एक पवित्र बीज भी बोते हैं”
– स्वामी चिदानन्द सरस्वती
ऋषिकेश। इस वर्ष अंतर्राष्ट्रीय मित्रता दिवस 2025 की थीम “सेतु निर्माण – आइए, प्रकृति के साथ करें मित्रता का सेतु निर्माण” रखी गई है। यह थीम न केवल व्यक्ति-व्यक्ति के संबंधों की बात करती है, बल्कि मानव और प्रकृति के बीच आत्मीय संबंध को भी नए सिरे से समझने और निभाने की प्रेरणा देती है।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने ऋषिकेश में इस अवसर पर कहा कि मित्रता का आशय केवल सामाजिक मेलजोल नहीं है, बल्कि यह एक भावनात्मक और व्यवहारिक पुल है जो समाज, संस्कृति, देश और प्रकृति के बीच सामंजस्य को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि आज जब मानव तकनीक के शिखरों को छू रहा है, वहीं जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण संकट जैसी चुनौतियां भी हमारे सामने हैं। ऐसे में आवश्यक है कि हम प्रकृति को केवल संसाधन नहीं, बल्कि पुराना मित्र मानकर उसका संरक्षण करें।

स्वामी जी ने कहा,
“जब हम पौधे लगाते हैं, तो न केवल हरियाली बढ़ाते हैं, बल्कि धरती के साथ मित्रता का एक पवित्र बीज भी बोते हैं।”
“जल की एक-एक बूंद बचाना, नदियों से मित्रता निभाना है और प्लास्टिक मुक्त जीवन जीना, वायु और पृथ्वी के प्रति सम्मान प्रकट करना है।”
उन्होंने अपील की कि मित्रता दिवस के दिन हम अपने प्रिय मित्रों के नाम एक पौधा लगाएं और उपहार स्वरूप उन्हें पर्यावरण-संवेदनशील चीजें जैसे बीज बम, पौधे या पुनः उपयोगी वस्तुएं भेंट करें।

मित्रता दिवस का यह संदेश है — जहां सेतु होंगे, वहीं समरसता होगी। जहां समरसता होगी, वहीं शांति और समृद्धि होगी।
“सेतु बनाएं, समरसता लाएं, जीवन को हरित मित्रता से सजाएं।”
