ऋषिकेश

बाघखाला में कांवड़ यात्रियों के लिए परमार्थ निकेतन का सेवा शिविर, चिकित्सा व स्वच्छ पेयजल की सुविधा

हजारों श्रद्धालुओं को जल मंदिरों के माध्यम से मिल रहा शीतल पेयजल, स्वच्छता जागरूकता के लिए साबुन भी वितरित

ऋषिकेश। श्रावण मास में देवभूमि उत्तराखंड बोल बम के जयघोष से गूंज रही है। लाखों कांवड़ यात्री आस्था और श्रद्धा के साथ नीलकंठ महादेव की ओर बढ़ रहे हैं। इसी क्रम में परमार्थ निकेतन की ओर से राजाजी नेशनल पार्क के बाघखाला में कांवड़ यात्रियों के लिए चिकित्सा सेवा, स्वच्छ पेयजल एवं जन-जागरूकता शिविर संचालित किया जा रहा है।

यह सेवा अभियान 29 जुलाई, गुरु पूर्णिमा के अवसर पर शुरू किया गया। अभियान के तहत चिकित्सा सहायता, स्वास्थ्य, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और मानवीय मूल्यों के प्रति जागरूकता का संदेश दिया जा रहा है।

 

12 घंटे लगातार चिकित्सा सेवा

परमार्थ पीठाधीश्वर स्वामी चिदानन्द सरस्वती के मार्गदर्शन में संचालित निःशुल्क चिकित्सा एवं जन-जागरूकता शिविर में कांवड़ यात्रियों को प्राथमिक उपचार, स्वास्थ्य परामर्श, आवश्यक दवाइयां और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। अनुभवी चिकित्सक, नर्सिंग स्टाफ और स्वयंसेवकों की टीम सुबह 7 बजे से शाम 7 बजे तक यात्रियों की सेवा में जुटी है।

लंबी पैदल यात्रा के कारण कई श्रद्धालुओं को थकान, पैरों में सूजन, छाले, मांसपेशियों में दर्द, निर्जलीकरण और मौसम संबंधी स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। शिविर में उपचार के साथ श्रद्धालुओं को पर्याप्त पानी पीने, संतुलित आहार लेने और बीच-बीच में विश्राम करने के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है।

जल मंदिरों से हजारों श्रद्धालुओं को पेयजल

परमार्थ निकेतन की ओर से विभिन्न जल मंदिरों के माध्यम से हजारों कांवड़ यात्रियों को स्वच्छ और शीतल पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है। तपती धूप और लंबी पदयात्रा के बीच यह जल सेवा श्रद्धालुओं के लिए राहत का माध्यम बनी हुई है। इसके माध्यम से श्रद्धालुओं को उत्तराखंड की सेवा, अतिथि देवो भव, प्रेम और अपनत्व की संस्कृति का संदेश भी दिया जा रहा है।

साबुन वितरण कर दिया स्वच्छता का संदेश

सेवा अभियान के तहत व्यक्तिगत स्वच्छता एवं स्वास्थ्य को लेकर भी जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। शिविर में आने वाले कांवड़ यात्रियों को साबुन वितरित किए जा रहे हैं। श्रद्धालुओं को स्वच्छता अपनाने और स्वस्थ रहने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

‘शिवलिंग के साथ धरती का भी करें जलाभिषेक’

स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि कांवड़ यात्रा केवल आस्था की यात्रा नहीं, बल्कि अनुशासन, सेवा और संस्कारों की यात्रा है। शिवत्व को जीवन में धारण करने के लिए सेवा, स्वच्छता, संवेदनशीलता और प्रकृति संरक्षण को भी जीवन का हिस्सा बनाना होगा।

उन्होंने कहा कि जिस प्रकार भगवान शिव का जलाभिषेक किया जाता है, उसी प्रकार धरती मां का भी धराभिषेक किया जाए। एक ओर शिवलिंग पर जल अर्पित करें तो दूसरी ओर धरती मां को हरियाली का उपहार दें। जल की रक्षा, वृक्षारोपण, स्वच्छता और प्रकृति का सम्मान ही आज की बड़ी शिव साधना है।

उन्होंने कांवड़ यात्रियों से सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग कम करने, कूड़ा इधर-उधर न फेंकने, जल स्रोतों को स्वच्छ रखने और पर्यावरण संरक्षण में सहयोग करने की अपील की।

बाघखाला में आयोजित स्वास्थ्य शिविर में परमार्थ निकेतन, डिवाइन शक्ति फाउंडेशन, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग उत्तराखंड तथा केयर नर्सिंग कॉलेज, हरिद्वार की टीमें सहयोग प्रदान कर रही हैं।

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