मानव तस्करी रोकने में समाज की सहभागिता सबसे महत्वपूर्ण
विश्व मानव तस्करी विरोध दिवस पर विधिक जागरूकता शिविर आयोजित, पीड़ितों के अधिकारों और कानूनी सहायता की दी जानकारी
पौड़ी। विश्व मानव तस्करी विरोध दिवस के अवसर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, जिला परिवीक्षा कार्यालय, पुलिस विभाग एवं अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में शुक्रवार को अजीम प्रेमजी फाउंडेशन सभागार में विधिक साक्षरता एवं जागरूकता शिविर आयोजित किया गया। शिविर में मानव तस्करी की रोकथाम, पीड़ितों के अधिकारों के संरक्षण और निःशुल्क विधिक सहायता से जुड़े प्रावधानों की जानकारी दी गई।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्राधिकरण की सचिव एवं सिविल जज (सीनियर डिवीजन) नाज़िश कलीम ने कहा कि मानव तस्करी एक गंभीर सामाजिक अपराध है। इसकी रोकथाम के लिए समाज की सक्रिय सहभागिता और व्यापक जनजागरूकता जरूरी है। उन्होंने कहा कि पीड़ितों को समय पर कानूनी सहायता मिलने से उन्हें न्याय दिलाने में मदद मिलती है। उन्होंने लोगों से मानव तस्करी के खिलाफ जागरूक रहने और पीड़ितों के अधिकारों की रक्षा के लिए आगे आने की अपील की।
जिला परिवीक्षा अधिकारी अरविन्द कुमार ने मानव तस्करी के पीड़ितों के पुनर्वास तथा उनके लिए संचालित विभिन्न सरकारी कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी। उपनिरीक्षक मुकेश गैरोला ने मानव तस्करी की पहचान और रोकथाम के उपायों के बारे में बताया। उन्होंने किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तत्काल पुलिस को देने की अपील की।
डिप्टी लीगल एड डिफेंस काउंसिल महेश बलूनी ने मानव तस्करी से संबंधित कानूनी प्रावधानों, पीड़ितों को उपलब्ध निःशुल्क विधिक सहायता और उनके अधिकारों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
शिविर में मानव तस्करी के कारणों, दुष्परिणामों, बचाव के उपायों और पीड़ितों के पुनर्वास से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई। इस अवसर पर प्रतिभागियों को मानव तस्करी के उन्मूलन में सक्रिय सहयोग देने और पीड़ितों के अधिकारों की रक्षा के लिए शपथ भी दिलाई गई।
कार्यक्रम में अजीम प्रेमजी फाउंडेशन से श्वेता, ऋषभ एवं हाशिल, जिला परिवीक्षा कार्यालय से प्रज्ञा नैथानी, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की अधिकार मित्र लक्ष्मी नेगी एवं बबीता देवी सहित पराग इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस के छात्र-छात्राएं और अन्य प्रतिभागी मौजूद रहे।
