स्थानीय बोलियों को अपनाकर ही समृद्ध होगी हिंदी: प्रो. अधीर कुमार
मुनिकी रेती/ऋषिकेश। हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर प्रेस क्लब मुनिकी रेती द्वारा नगर पालिका परिषद सभागार में एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस गोष्ठी में मुख्य अतिथि श्री देव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय के प्रो. अधीर कुमार, नगर पालिका अध्यक्ष नीलम बिजल्वाण और कार्यक्रम अध्यक्ष महंत मनोज द्विवेदी सहित क्षेत्र के प्रबुद्ध जनों ने शिरकत की। दीप प्रज्वलन और अतिथियों के स्वागत के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ।

हिंदी को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए अहंकार छोड़ना जरूरी: प्रो. अधीर कुमार
मुख्य अतिथि प्रो. अधीर कुमार (मूल निवासी बेगूसराय, बिहार, जो 27 वर्षों से उत्तराखंड में शिक्षा क्षेत्र में कार्यरत हैं) ने अपने संबोधन में कहा कि हिंदी को वैश्विक पटल पर स्थापित करने के लिए अहंकार का त्याग करना और क्षेत्रीय बोलियों, रहन-सहन व संस्कृति का संवर्धन करना आवश्यक है।
उन्होंने स्पष्ट किया:
भाषा विवादित नहीं है, बल्कि हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने की आवाज सबसे पहले दक्षिण और पश्चिम भारत से उठी थी।
जब हम दूसरों की बोलियों और संस्कृतियों को अपनाएंगे, तभी वे भी हिंदी को सहर्ष स्वीकार करेंगे।
इंसान सबसे पहले अपनी मातृ बोली सीखता है; इसलिए जब भाषा से अहंकार समाप्त होगा, तभी हिंदी स्वाभाविक रूप से मातृभाषा का व्यापक स्वरूप लेकर विश्व पटल पर अपनी पहचान बनाएगी।
घर-परिवार से शुरुआत और गढ़वाली बोली का संरक्षण: नीलम बिजल्वाण
विशिष्ट अतिथि नीलम बिजल्वाण ने प्रेस क्लब के प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि हिंदी को सबसे पहले अपने घर और समाज में स्थान देना होगा। अंग्रेजी के बढ़ते प्रभाव के बीच अपनी स्थानीय गढ़वाली बोली को बढ़ावा देकर आने वाली पीढ़ी को सिखाना अत्यंत आवश्यक है।
साहित्यिक प्रस्तुतियां और पुस्तक विमोचन
गोष्ठी में विविध सांस्कृतिक एवं साहित्यिक गतिविधियां आयोजित की गईं:
काव्य सप्त रश्मि का विमोचन: इस अवसर पर डॉ. रश्मि पैन्यूली द्वारा रचित काव्य संग्रह ‘सप्त रश्मि’ का विमोचन किया गया।
विचारधारा: वरिष्ठ अधिवक्ता रमाबल्लभ भट्ट ने हिंदी को राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बताया, पूर्व शिक्षक विनोद द्विवेदी ने भाषा को संस्कृति की मर्यादा बताया, और प्रेस क्लब के पूर्व अध्यक्ष सूर्य चंद्र सिंह चौहान ने मुग़ल व अंग्रेजी प्रभाव से मुक्त होकर अपनी बोलियों के प्रयोग पर जोर दिया।
काव्य पाठ: विश्वम्भरी भट्ट, सत्येंद्र चौहान, रामकृष्ण पोखरियाल, डॉ. रश्मि पैन्यूली और महेश चित्कारिया ने अपनी कविताओं के माध्यम से हिंदी के महत्व को रेखांकित किया।
कार्यक्रम का समापन
कार्यक्रम अध्यक्ष महंत मनोज प्रपन्नाचार्य ने कहा कि आज विदेशी मेहमान भी हिंदी सीख रहे हैं और इसका प्रयोग कर रहे हैं, जो गर्व की बात है। उन्होंने सभी का आभार व्यक्त करते हुए हिंदी को घर-घर अपनाने का आह्वान किया।
गोष्ठी का सफल संचालन सुदीप पंचभैया ने अपने अनोखे अंदाज में किया। इस दौरान प्रेस क्लब अध्यक्ष संजय बडोला, महासचिव आशीष लखेड़ा, उपाध्यक्ष भारत भूषण कुकरेती, कोषाध्यक्ष धनीराम बिंजोला सहित जगदम्बा कण्डारी, खुशहाल सिंह राणा, सत्येंद्र सिंह रावत और भारी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
