पौड़ी

सेब-कीवी की बागवानी से दीनदयाल बने आत्मनिर्भर, हर सीजन में कमा रहे 3 से 4 लाख रुपये अतिरिक्त

सरकारी योजनाओं और आधुनिक तकनीक का किया बेहतर इस्तेमाल, गांव की अनुपयोगी भूमि को बनाया आय का जरिया

पौड़ी। पलायन और सीमित रोजगार की चुनौती के बीच पर्वतीय क्षेत्रों में आधुनिक बागवानी ग्रामीणों के लिए स्वरोजगार और आय का मजबूत माध्यम बन रही है। विकासखंड थलीसैंण के सुकई (बंज्वाड़) गांव निवासी दीनदयाल बिष्ट ने सेब और कीवी की बागवानी को अपनाकर इसका प्रेरणादायक उदाहरण पेश किया है। सरकारी योजनाओं और वैज्ञानिक तकनीक के समन्वय से वह हर सीजन में करीब 3 से 4 लाख रुपये की अतिरिक्त आय अर्जित कर रहे हैं।

दीनदयाल बिष्ट विकासखंड बीरोंखाल स्थित राजकीय इंटर कॉलेज बैंजरो में रसायन विज्ञान के प्रवक्ता हैं। कोविड लॉकडाउन के दौरान उन्होंने गांव में पड़ी अनुपयोगी भूमि का सदुपयोग करने का निर्णय लिया और वैज्ञानिक पद्धति से सेब एवं कीवी की बागवानी शुरू की। शुरुआत छोटे स्तर से हुई, लेकिन धीरे-धीरे यह प्रयास उनकी अतिरिक्त आय का महत्वपूर्ण स्रोत बन गया।

सरकारी योजनाओं का लिया लाभ

बाग के विकास में दीनदयाल ने विभिन्न सरकारी योजनाओं का प्रभावी उपयोग किया। मनरेगा के माध्यम से बाग की घेरबाड़ कराई गई। कृषि विभाग की सहायता से जियोटैंक और हाइड्रो प्रोजेक्ट पाइपलाइन के जरिए सिंचाई व्यवस्था विकसित की गई। वहीं उद्यान विभाग की ओर से पौध चयन, पौधरोपण, रखरखाव और वैज्ञानिक प्रबंधन को लेकर तकनीकी मार्गदर्शन दिया गया। आधुनिक तकनीकों को अपनाने से बाग में उत्पादन और गुणवत्ता में भी सुधार हुआ।

पर्वतीय क्षेत्रों में बागवानी की बढ़ती संभावनाएं

जिला उद्यान अधिकारी मनोरंजन भांडाडी ने बताया कि जनपद में सेब, कीवी सहित उच्च मूल्य वाली फल बागवानी को बढ़ावा देने के लिए किसानों को तकनीकी परामर्श, प्रशिक्षण और विभागीय योजनाओं के माध्यम से सहयोग दिया जा रहा है। पर्वतीय क्षेत्रों की जलवायु इन फसलों के लिए अनुकूल है। वैज्ञानिक पद्धति अपनाकर किसान कम भूमि में भी बेहतर उत्पादन और आय प्राप्त कर सकते हैं।

दीनदयाल बिष्ट की सफलता यह संदेश देती है कि सरकारी योजनाओं का सही लाभ, आधुनिक तकनीक और मेहनत को साथ लेकर पर्वतीय गांवों में रहकर भी अच्छी आय अर्जित की जा सकती है। उनका यह प्रयास आत्मनिर्भर उत्तराखंड और पलायन की चुनौती को अवसर में बदलने की दिशा में एक प्रेरक उदाहरण बनकर सामने आया है।

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