पौड़ी

कोट और देवल में फूलों व सब्जियों की खेती से बदलेगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था : जिलाधिकारी

पौड़ी गढ़वाल। जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने गुरुवार को विकासखंड कोट के कोट एवं देवल गांव का भ्रमण कर पॉलीहाउस आधारित खेती, सब्जी उत्पादन और लिलियम पुष्प उत्पादन गतिविधियों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने किसानों से संवाद कर उनकी समस्याओं और आवश्यकताओं की जानकारी ली तथा कृषि उत्पादों के बेहतर विपणन और किसानों की आय बढ़ाने के लिए अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।

कोट गांव में निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने पॉलीहाउस में उगाई जा रही सब्जियों और लिलियम पुष्पों का अवलोकन किया। उन्होंने किसानों को पारंपरिक खेती के साथ मशरूम, औषधीय एवं सुगंधित पौधों सहित अन्य लाभकारी फसलों को अपनाने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि कृषि विविधीकरण से किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है।

महिला कृषकों ने जिलाधिकारी को बताया कि क्षेत्र में कोल्ड स्टोरेज की सुविधा उपलब्ध होने से फूलों को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकेगा और बेहतर कीमत मिलने की संभावना बढ़ेगी। इस पर जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को किसी अनुपयोगी सरकारी भवन का चिन्हीकरण कर वहां कोल्ड स्टोरेज विकसित करने का प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए।

किसानों ने कृषि उत्पादों के परिवहन में आने वाली कठिनाइयों का भी उल्लेख किया। इस पर जिलाधिकारी ने समूह आधारित यूटिलिटी वाहन उपलब्ध कराने की संभावनाओं पर प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश देते हुए कहा कि समय पर बाजार तक पहुंच किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

इसके बाद जिलाधिकारी ने देवल गांव में प्रगतिशील कृषक नरेश द्वारा संचालित पॉलीहाउस और लिलियम खेती का निरीक्षण किया। उन्होंने आधुनिक कृषि तकनीकों की सराहना करते हुए अन्य किसानों को भी नवाचार अपनाने के लिए प्रेरित किया।

जिलाधिकारी ने उद्यान एवं कृषि विभाग को क्षेत्र के प्रमुख कृषि और उद्यानिकी उत्पादों की विस्तृत बुकलेट तैयार करने, स्थानीय उत्पादों की ब्रांडिंग बढ़ाने और नए पॉलीहाउस विकसित करने के निर्देश दिए। साथ ही वर्षा जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए वाटर हार्वेस्टिंग टैंक निर्माण प्रस्तावों को जिला योजना में शामिल करने को कहा।

उन्होंने कहा कि आधुनिक खेती, वैज्ञानिक भंडारण, प्रभावी विपणन और मूल्य संवर्धन के माध्यम से पर्वतीय क्षेत्रों में कृषि को लाभकारी व्यवसाय बनाया जा सकता है। महिला स्वयं सहायता समूहों और महिला कृषकों को कृषि एवं उद्यानिकी गतिविधियों से जोड़कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को और अधिक मजबूत किया जा सकता है।

जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों को सब्जी, लहसुन, लिलियम तथा अन्य स्थानीय उत्पादों के लिए बेहतर विपणन तंत्र विकसित करने के निर्देश देते हुए कहा कि किसानों को उनके उत्पादों का उचित मूल्य दिलाना प्रशासन की प्राथमिकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *