गुरु पूर्णिमा पर परमार्थ निकेतन में भव्य गुरु पूजन, स्वामी चिदानन्द सरस्वती का प्रकृति-संस्कृति संरक्षण का संदेश
ऋषिकेश। गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर परमार्थ निकेतन में गुरु पूजन एवं पादुका पूजन का भव्य आयोजन श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ संपन्न हुआ। भारत सहित विश्व के अनेक देशों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष परम पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज के श्रीचरणों में संकीर्तन, भजन और भावांजलि अर्पित कर गुरु परम्परा के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की। वहीं परमार्थ गुरुकुल के ऋषिकुमारों ने गुरु-शिष्य परम्परा की दिव्यता को आत्मसात करते हुए विशेष प्रस्तुतियां दीं।

इस अवसर पर स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने देशवासियों और विश्वभर में सनातन संस्कृति से जुड़े श्रद्धालुओं को गुरु पूर्णिमा की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि गुरु पूर्णिमा केवल गुरु के प्रति श्रद्धा प्रकट करने का पर्व नहीं, बल्कि जीवन को पूर्णता, समर्पण और सेवा से जोड़ने का दिव्य अवसर है। भारतीय गुरु परम्परा हमें ज्ञान के साथ प्रकृति, संस्कृति और समस्त सृष्टि के साथ संतुलित जीवन जीने की प्रेरणा देती है।
उन्होंने कहा कि गुरु पूर्णिमा पूर्ण होने, समर्पण, कृतज्ञता और आत्मबोध का पर्व है। महर्षि वेदव्यास, आदि गुरु शंकराचार्य और संपूर्ण गुरु परम्परा को नमन करते हुए उन्होंने कहा कि गुरु के आशीर्वाद से ही जीवन में प्रकाश, दिशा और दिव्यता का अनुभव होता है। गुरु हमें अज्ञान, तनाव, मोह और भटकाव से मुक्त कर आत्मचेतना की ओर ले जाते हैं।
स्वामी जी ने कहा कि मनुष्य अपनी इच्छाओं और वासनाओं का गुलाम बनकर जीवन में दुख और निराशा का अनुभव करता है, जबकि समर्पण और सेवा का मार्ग ही वास्तविक मुक्ति का मार्ग है। गुरु पूर्णिमा स्वयं को सजाने, अपने कर्मों को श्रेष्ठ बनाने और आत्मिक प्रकाश को जगाने का पर्व है।
उन्होंने वैश्विक परमार्थ परिवार को ऑनलाइन माध्यम से भी आशीर्वचन प्रदान करते हुए मानवता की सेवा के लिए समय, प्रतिभा, दृढ़ता और तकनीक का सदुपयोग करने का आह्वान किया।
पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि “परम्पराओं को बचाएं, पर्यावरण को भी बचाएं। संतति को बचाना है तो प्रकृति और संस्कृति दोनों को बचाना होगा।” उन्होंने गुरु पूर्णिमा पर प्रत्येक व्यक्ति से अपने सद्गुरु के नाम एक पौधा लगाने और उसके संरक्षण का संकल्प लेने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण केवल पर्यावरण संरक्षण नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य और गुरु उपदेशों को जीवन में उतारने का श्रेष्ठ माध्यम है।
गुरु पूर्णिमा महोत्सव के दौरान पूरे परमार्थ निकेतन परिसर में आध्यात्मिक वातावरण, वैदिक मंत्रोच्चार, भजन-कीर्तन और गुरु वंदना की गूंज रही। श्रद्धालुओं ने गुरु चरणों में श्रद्धा अर्पित कर आध्यात्मिक ऊर्जा और प्रेरणा प्राप्त की।
