पौड़ी

स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही बर्दाश्त नहीं, बिना अनुमति अवकाश पर कार्रवाई तय: डीएम

टीबी मरीजों के तत्काल उपचार, संस्थागत प्रसव बढ़ाने और अस्पताल व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के निर्देश

पौड़ी, 14 मई। जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया की अध्यक्षता में गुरुवार को कलेक्ट्रेट सभागार में स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों, संस्थागत प्रसव, टीबी मुक्त भारत अभियान, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं, अस्पताल व्यवस्थाओं तथा मूलभूत सुविधाओं की विस्तृत समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने स्वास्थ्य अधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी तथा बिना पूर्व अनुमति अवकाश पर जाने वाले चिकित्साधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

बैठक में एसीएमओ डॉ. विनय कुमार त्यागी ने पीसीपीएनडीटी, निक्षय पोषण योजना एवं स्वास्थ्य सूचकांकों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जनपद में वर्तमान में 11 सरकारी और 21 निजी अल्ट्रासाउंड एवं सीटी स्कैन केंद्र संचालित हैं। जिलाधिकारी ने अल्ट्रासाउंड मशीनों के नवीनीकरण को अनुमति देते हुए सभी केंद्रों की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी शिव मोहन शुक्ला ने बताया कि जनपद के सभी स्वास्थ्य केंद्रों में रेबीज टीकों की उपलब्धता सुनिश्चित कर दी गई है। टीबी मुक्त भारत अभियान की समीक्षा के दौरान बताया गया कि चिन्हित 395 मरीजों में से 376 का उपचार शुरू किया जा चुका है। इस पर जिलाधिकारी ने शेष मरीजों का उपचार तत्काल प्रारंभ कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि टीबी मरीजों की नियमित काउंसिलिंग एवं घर-घर निगरानी सुनिश्चित की जाए तथा वरिष्ठ उपचार पर्यवेक्षक प्रत्येक माह मरीजों से व्यक्तिगत रूप से मिलें।

एक्स-रे सेवाओं की समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि जिन विकासखंडों में एक्स-रे मशीनें उपलब्ध नहीं हैं, वहां पोर्टेबल मशीनों के माध्यम से जांच सुविधा उपलब्ध कराई जाए। साथ ही नए तकनीशियनों की नियुक्ति तक चिकित्सा प्रबंधन समिति निधि से अस्थायी तकनीशियनों की व्यवस्था करने को कहा गया।

संस्थागत प्रसव को लेकर जिलाधिकारी ने महिला चिकित्सा अधिकारियों को अधिक सक्रिय भूमिका निभाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि गर्भवती महिलाओं की नियमित निगरानी, समय पर स्वास्थ्य परीक्षण, परामर्श एवं आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं ताकि सुरक्षित मातृत्व को बढ़ावा मिल सके। बाल मृत्यु दर की समीक्षा करते हुए उन्होंने गर्भवती महिलाओं के समय पर अल्ट्रासाउंड एवं जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

बैठक में जिलाधिकारी ने प्रभारी चिकित्साधिकारियों की कार्यप्रणाली पर नाराजगी व्यक्त करते हुए स्पष्ट किया कि बिना अनुमति कोई भी अधिकारी अवकाश पर नहीं जाएगा। उन्होंने सीएमओ को निर्देश दिए कि बिना स्वीकृत अवकाश अनुपस्थित पाए जाने वाले चिकित्सकों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध प्रतिकूल प्रविष्टि की कार्रवाई की जाए। साथ ही 30 जून तक अस्पतालों का निरीक्षण कर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया।

जिलाधिकारी ने अस्पतालों में मूलभूत सुविधाएं दुरुस्त रखने के निर्देश देते हुए कहा कि मरीजों को किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं होनी चाहिए। उन्होंने चिकित्सा प्रबंधन समिति की बैठक शीघ्र आयोजित कर आवश्यक उपकरणों एवं सामग्री की खरीद प्रक्रिया समयबद्ध ढंग से पूरी करने को कहा।

एंबुलेंस सेवाओं की समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने प्रत्येक एंबुलेंस में आपातकालीन चिकित्सा तकनीशियन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही खराब एंबुलेंसों की सूची उपलब्ध कराने और समय पर मरम्मत कराने को कहा।

स्वास्थ्य संस्थानों में पेयजल व्यवस्था की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने सतपुली, पैठाणी एवं घंडियाल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में पेयजल कार्य शीघ्र शुरू कराने तथा यमकेश्वर सीएचसी में स्टोरेज निर्माण कर नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

बैठक में चेलूसैंण एवं खिर्सू सीएचसी में कम संस्थागत प्रसव होने पर दोनों केंद्रों से एक-एक महिला चिकित्सा अधिकारी का स्थानांतरण सीएचसी थलीसैंण करने के निर्देश भी दिए गए। जिलाधिकारी ने कहा कि खराब प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

बैठक में एसीएमओ डॉ. पारुल गोयल, बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. हितेन जंगपांगी, डॉ. आशीष गुसाईं, डॉ. जितेंद्र भारती, डॉ. प्रदीप, डॉ. अमित मेहरा, डॉ. पूजा पाटिल, डॉ. मीनाक्षी वर्मा, डॉ. रमा रानी, ई-डिस्ट्रिक्ट मैनेजर सचिन भट्ट सहित सभी विकासखंडों के चिकित्साधिकारी एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।

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