परमार्थ निकेतन में गणेश शंकर विद्यार्थी को श्रद्धांजलि, गंगा आरती समर्पित
स्वामी चिदानन्द सरस्वती बोले—नैतिक और जनपक्षधर पत्रकारिता के आदर्श आज भी प्रासंगिक
ऋषिकेश। पवित्र नगरी ऋषिकेश स्थित परमार्थ निकेतन में महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं प्रख्यात पत्रकार गणेश शंकर विद्यार्थी की पुण्यतिथि पर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर परमार्थ गंगा आरती उन्हें समर्पित करते हुए उनके आदर्शों, मूल्यों और राष्ट्रसेवा के प्रति समर्पण को स्मरण किया गया।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि गणेश शंकर विद्यार्थी भारतीय पत्रकारिता के उन महान स्तंभों में से थे, जिन्होंने पत्रकारिता को समाज परिवर्तन और राष्ट्र निर्माण का सशक्त माध्यम बनाया। ‘प्रताप’ समाचार पत्र के माध्यम से उन्होंने आमजन की आवाज को बुलंद किया और समाज में व्याप्त अन्याय, शोषण एवं असमानता के खिलाफ निर्भीकता से संघर्ष किया।

वक्ताओं ने उनके जीवन को नैतिकता, निष्पक्षता और जनहित की मिसाल बताते हुए कहा कि उन्होंने कभी भी दबाव के आगे झुकना स्वीकार नहीं किया और हमेशा सत्य का साथ दिया। वंचित एवं पीड़ित वर्गों के अधिकारों के लिए उनकी आवाज उन्हें एक जननायक के रूप में स्थापित करती है।
स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान को याद करते हुए कहा गया कि उनका मानना था कि सच्ची आजादी तभी संभव है, जब समाज के हर वर्ग को समान अधिकार और सम्मान मिले। उन्होंने सामाजिक समरसता और एकता को बढ़ावा देने के लिए भी महत्वपूर्ण कार्य किए।
इस अवसर पर स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि वर्तमान समय में, जब पत्रकारिता अनेक चुनौतियों से गुजर रही है, तब गणेश शंकर विद्यार्थी के सिद्धांत और भी अधिक प्रासंगिक हो गए हैं। उनकी निर्भीकता, सत्यनिष्ठा और जनपक्षधरता आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत है।
उन्होंने आह्वान किया कि पत्रकारिता को पुनः जनसेवा और राष्ट्रनिर्माण के मूल उद्देश्य से जोड़ा जाए तथा सत्य और नैतिकता के मार्ग पर चलते हुए समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का प्रयास किया जाए।
