वन भू-क्षेत्रों की बहाली एवं आजीविका संवर्द्धन पर कार्यशाला आयोजित
कोटद्वार। भारत-जर्मनी द्विपक्षीय सहयोग (बाईलेट्रल को-ऑपरेशन) के अंतर्गत वन भू-क्षेत्रों की बहाली तथा वनाधारित क्षेत्रों पर निर्भर स्थानीय समुदायों की आजीविका संवर्द्धन के उद्देश्य से गुरुवार को कोटद्वार स्थित टीओ क्वार्टर, तिलवाढंग बैरियर में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का आयोजन आरोही संस्था के तत्वावधान में किया गया।

“वन एवं वृक्ष आच्छादन के पुनर्स्थापन, संरक्षण एवं बचाव हेतु राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान के क्रियान्वयन” परियोजना के अंतर्गत आयोजित इस कार्यशाला की अध्यक्षता प्रभागीय वनाधिकारी सॉयल कंजर्वेशन एवं प्रभागीय वनाधिकारी लैंसडाउन द्वारा की गई।
कार्यशाला में पौड़ी गढ़वाल के चयनित क्लस्टरों के पारिस्थितिक तंत्र के विभिन्न आयामों पर समूह चर्चा की गई। प्रतिभागियों ने वर्तमान एवं भविष्य में पारिस्थितिक तंत्र पर पड़ने वाले प्रभावों का समुदाय की सहभागिता के माध्यम से विश्लेषण किया तथा संरक्षण एवं संवर्द्धन के उपायों पर विचार-विमर्श किया।
कार्यक्रम में असिस्टेंट डेवलपमेंट ऑफिसर, वन विभाग, कृषि विभाग एवं पर्यटन विभाग के अधिकारियों के साथ सरपंचों, ग्राम प्रधानों, स्वयं सहायता समूहों तथा जनप्रतिनिधियों ने सहभागिता की।
वन विभाग उत्तराखंड से सेवानिवृत्त एवं वर्तमान में जीआईजेड के सलाहकार डॉ. आर.एस. बिष्ट ने कार्यशाला का सफल संचालन किया। इस अवसर पर एफसीएफ से ज्योति, हाइमे ईरासो (कोलंबिया) सहित संस्था प्रतिनिधि डॉ. नारायण सिंह, नरेंद्र सिंह बिष्ट, श्रीमती अंजू रावत एवं श्रीमती रूपमा रावत भी उपस्थित रहे।
