गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी का आरोप, कमर्शियल सिलेंडर ₹5000 तक बिकने का दावा
देहरादून। उत्तराखंड में गैस सिलेंडरों की कथित किल्लत और कालाबाजारी को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। ‘मूल निवास भू-कानून संघर्ष समिति’ के संस्थापक-संयोजक मोहित डिमरी ने प्रदेश सरकार और खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग पर गंभीर आरोप लगाते हुए इसे प्रशासनिक विफलता बताया है।
मोहित डिमरी ने दावा किया कि जहां घरेलू गैस सिलेंडर का सरकारी मूल्य लगभग ₹932 है, वहीं कई क्षेत्रों में यह ₹1500 से ₹2000 तक ब्लैक में बेचा जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि ₹1937 कीमत वाला कमर्शियल सिलेंडर ₹4000 से ₹5000 तक में बेचा जा रहा है, जो आम जनता और छोटे व्यापारियों के लिए भारी आर्थिक बोझ बन गया है।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड जैसे पर्यटन आधारित राज्य में हजारों लोग ढाबों और रेस्टोरेंट्स के माध्यम से रोजगार चला रहे हैं, लेकिन गैस की कृत्रिम किल्लत के कारण कई व्यवसाय बंद होने की कगार पर हैं। इसके चलते होटलों में खाने की कीमतों में 10 से 20 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है, जिसका सीधा असर आम लोगों पर पड़ रहा है।
मोहित डिमरी ने इस स्थिति को “मानव निर्मित संकट” बताते हुए आरोप लगाया कि कुछ गैस एजेंसियां और बिचौलिए स्टॉक छिपाकर कालाबाजारी को बढ़ावा दे रहे हैं। साथ ही घरेलू सिलेंडरों की अवैध रूप से कमर्शियल उपयोग में रिफिलिंग किए जाने और विभागीय लापरवाही पर भी सवाल उठाए।
उन्होंने सरकार से जवाब मांगते हुए कहा कि जब गैस के दाम तय हैं तो खुलेआम कालाबाजारी कैसे हो रही है। साथ ही उन्होंने कई मांगें भी रखीं, जिनमें एंटी-ब्लैक मार्केटिंग टास्क फोर्स का गठन, दोषी एजेंसियों के लाइसेंस निरस्त करने, स्टॉक की पारदर्शिता सुनिश्चित करने, आपूर्ति व्यवस्था सुधारने और नियमित औचक निरीक्षण शामिल हैं।
अंत में उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे अपने क्षेत्र में हो रही कालाबाजारी की जानकारी साझा करें, ताकि इस समस्या के समाधान के लिए ठोस कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
