ऋषिकेश

परमार्थ निकेतन में अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव 2026 का भव्य समापन, 80 देशों के 1500 से अधिक योग साधकों की ऐतिहासिक सहभागिता

ऋषिकेश। गंगा के पावन तट पर स्थित परमार्थ निकेतन में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव 2026 का दिव्य और ऐतिहासिक समापन हो गया। एक सप्ताह तक चले इस वैश्विक आध्यात्मिक आयोजन में विश्व के 80 से अधिक देशों से 1500 से अधिक योग साधकों, 75 योगाचार्यों, 35 देशों के विद्यार्थियों सहित अनेक देशों के राजदूत, उच्चायुक्त और राजनयिकों ने सहभागिता की।

समापन समारोह में उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की गरिमामयी उपस्थिति रही। महोत्सव के दौरान पूरे सप्ताह में 150 से अधिक योग कक्षाएँ, कार्यशालाएँ, प्रवचन और संवाद सत्र आयोजित किए गए, जिनमें विश्वभर से आए साधकों ने योग, ध्यान और आध्यात्मिक साधनाओं का अनुभव प्राप्त किया।

सांस्कृतिक संध्या के दौरान पद्मश्री कैलाश खेर और कैलासा बैंड, प्रसिद्ध ड्रम वादक शिवमणि, प्रसिद्ध गायिका रूना रिजवी शिवमणि, भजन गायक राधिका दास, बैकस्टेज सिब्लिंग्स राघव और प्राची, तथा गायक एवं योगी गुरनिमित सिंह ने अपने संगीत से श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

यह महोत्सव परम पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती और साध्वी भगवती सरस्वती के दिव्य नेतृत्व में आयोजित किया गया, जिसमें भारत सरकार के आयुष मंत्रालय और पर्यटन मंत्रालय (इन्क्रेडिबल इंडिया) का सहयोग रहा।

समापन अवसर पर स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि योग सम्पूर्ण मानवता का साझा अमृत है और इसका संदेश “एक धरती, एक मानवता और एक वैश्विक चेतना” का है। उन्होंने कहा कि जब विभिन्न देशों के लोग गंगा तट पर एक साथ ध्यान और प्रार्थना करते हैं तो यह दृश्य “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना को साकार करता है।

महोत्सव में शामिल विभिन्न देशों के राजदूतों और राजनयिकों ने भी कहा कि परमार्थ निकेतन का यह पावन मंच विश्व शांति का जीवंत केंद्र है, जहाँ योग, ध्यान और आध्यात्मिकता के माध्यम से विभिन्न देशों, संस्कृतियों और विचारों के लोग एक परिवार की तरह जुड़ते हैं।

अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव की निदेशक डॉ. साध्वी भगवती सरस्वती ने कहा कि गंगा के तट से उठी यह आध्यात्मिक चेतना विश्वभर में शांति, प्रेम और एकता का संदेश दे रही है।

महोत्सव के समापन के साथ ही विभिन्न देशों से आए योग साधक भावुक मन से माँ गंगा के पावन तट से विदा लेते दिखाई दिए। सात दिनों तक योग, ध्यान, भक्ति और आध्यात्मिक अनुभवों से भरे इस आयोजन ने प्रतिभागियों के हृदय में अमिट स्मृतियाँ छोड़ दीं। प्रतिभागी अपने-अपने देशों में योग, शांति और सनातन मूल्यों का संदेश लेकर लौटे।

महोत्सव में अफगानिस्तान, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, रूस, फ्रांस, जर्मनी, जापान, नेपाल, कनाडा, ब्राजील, स्विट्जरलैंड, स्पेन, दक्षिण अफ्रीका, मंगोलिया, श्रीलंका सहित विश्व के 80 देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

इस दौरान लीला योग, हठ योग, अष्टांग योग, विन्यास योग, प्राणायाम, कुंडलिनी योग, ध्यान, योग निद्रा, नाद योग, साउंड हीलिंग, आयुर्वेदिक जीवनशैली, डिजिटल डिटॉक्स और चक्र संतुलन सहित अनेक योग विधाओं का अभ्यास कराया गया।

अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव 2026 ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि मानवता को जोड़ने वाली वैश्विक चेतना है।

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