ऋषिकेश

परमार्थ निकेतन में अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव का भव्य समापन, माँ गंगा तट पर जुटा विश्व

80 देशों से आए योग साधकों, राजनयिकों और योगाचार्यों ने सामूहिक साधना के साथ दिया विश्व शांति का संदेश

ऋषिकेश। अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव 2026 का भव्य समापन परमार्थ निकेतन के पावन माँ गंगा तट पर आध्यात्मिक ऊर्जा, प्रेम और वैश्विक एकता के संदेश के साथ सम्पन्न हुआ। विश्व के लगभग 80 देशों से आए 1500 से अधिक योग साधक, 75 योगाचार्य, 35 देशों के विद्यार्थी और 10 देशों के राजदूत, राजनयिक तथा उच्चायुक्त एक ही स्थान पर एकत्रित होकर योग, ध्यान और प्रार्थना के माध्यम से विश्व शांति का संकल्प लेते दिखाई दिए।

 

महोत्सव के अंतिम दिन की शुरुआत सामूहिक योग साधना से हुई। भगवान शिव की विशाल प्रतिमा के चरणों में आयोजित इस विशेष योग सत्र में योगाचार्य गंगा नन्दिनी के नेतृत्व में विभिन्न देशों से आए साधकों और राजनयिकों ने एक साथ योगाभ्यास किया। इस अवसर पर इक्वाडोर के राजदूत फर्नांडो जेवियर बुचेली वर्गास, गुयाना के उच्चायुक्त धरमकुमार सीराज, बेलारूस के राजदूत मिखाइल कास्को, मंगोलिया के राजदूत गणबोल्ड दंबाजाव सहित अनेक योगाचार्य और साधकों ने सहभागिता की।

यह आयोजन अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस (21 जून) की 100 दिवसीय उलटी गिनती के 98वें दिन के रूप में भी विशेष महत्व रखता है। सप्ताह भर चले इस महोत्सव में योग, ध्यान, आध्यात्मिक संवाद, आयुर्वेद, संगीत, नृत्य और ध्यान सत्रों के माध्यम से प्रतिभागियों ने आत्मिक शांति और जागरूक जीवनशैली का अनुभव किया।

महोत्सव का आयोजन स्वामी चिदानन्द सरस्वती और साध्वी भगवती सरस्वती के दिव्य मार्गदर्शन में, आयुष मंत्रालय और पर्यटन मंत्रालय भारत सरकार के सहयोग से किया गया।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि भारत केवल एक भूभाग नहीं बल्कि एक चेतना है, जो “वसुधैव कुटुम्बकम्” और “सर्वे भवन्तु सुखिनः” का संदेश देती है। योग मन, आत्मा और सम्पूर्ण मानवता को जोड़ने वाला सेतु है।

वहीं साध्वी भगवती सरस्वती ने कहा कि प्रेम हमारे शरीर, मन और संबंधों को बदलने की शक्ति रखता है। आधुनिक विज्ञान भी अब स्वीकार करता है कि प्रेम और करुणा मानव स्वास्थ्य और मानसिक संतुलन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

महोत्सव के अंतिम दिवस पर “द योग ऑफ लव – ओपनिंग द हार्ट ऐज अ पाथ ऑफ अवेकनिंग” विषय पर विशेष आध्यात्मिक सत्र आयोजित हुआ, जिसमें ब्राजील से आए संत प्रेम बाबा और साध्वी भगवती सरस्वती ने प्रेम, करुणा और भक्ति को योग का वास्तविक सार बताया।

दिनभर विभिन्न योग और आध्यात्मिक सत्र आयोजित हुए, जिनमें योगासन, प्राणायाम, ध्यान, योग थेरेपी, आयुर्वेद और भक्ति संगीत के माध्यम से प्रतिभागियों को आंतरिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव कराया गया।

अंत में गंगा तट पर भव्य गंगा आरती, संगीत, नृत्य और आध्यात्मिक उत्सव के साथ अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव 2026 का दिव्य और प्रेरणादायी समापन हुआ।

यह महोत्सव विश्व को शांति, प्रेम, करुणा और एकता का संदेश देते हुए मानवता के आध्यात्मिक जागरण का एक अद्भुत संगम बन गया।

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