परमार्थ निकेतन में अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव का छठा दिन, गंगा तट पर योग-ध्यान से गुंजायमान हुआ वातावरण
ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव 2026 के छठे दिन प्रातःकालीन योग साधना की दिव्य झलकियां देखने को मिलीं। मां गंगा के पावन तट पर उगते सूर्य की सुनहरी किरणों के बीच देश-विदेश से आए योग साधकों ने योगासन, प्राणायाम और ध्यान का अभ्यास किया। इस दौरान सम्पूर्ण वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा, शांति और सकारात्मकता से भर उठा।
गंगा की शीतल लहरों और प्राकृतिक सौंदर्य के बीच योग साधकों ने शरीर, मन और आत्मा के संतुलन का अनुभव किया। योगाचार्यों के मार्गदर्शन में प्रतिभागियों ने विभिन्न योग आसनों, प्राणायाम और ध्यान की विधियों का अभ्यास करते हुए योग के वास्तविक स्वरूप को आत्मसात किया।

योगाचार्यों ने कहा कि गंगा तट पर किया गया योग केवल शारीरिक स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्मा को जागृत करने की साधना है। हर आसन और हर श्वास हमें यह स्मरण कराती है कि योग केवल अभ्यास नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक कला है, जो मनुष्य को स्वयं से, प्रकृति से और परमात्मा से जोड़ती है।
अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव में विश्व के विभिन्न देशों से आए योग साधकों की एकता ने यह संदेश दिया कि जब मन शांत और हृदय जागृत हो, तो पूरी मानवता एक परिवार बन जाती है। महोत्सव के दौरान योग, ध्यान, आध्यात्मिक प्रवचनों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से भारतीय योग परंपरा की वैश्विक महत्ता को भी रेखांकित किया जा रहा है।
