योग धर्म से युग धर्म: अभ्युदय 2026 में गूंजा राष्ट्र निर्माण का संकल्प
हरिद्वार। शनिवार 21 फरवरी को पतंजलि विश्वविद्यालय, हरिद्वार में आयोजित ‘योग धर्म से युग धर्म, अभ्युदय 2026’ कार्यक्रम योग, आयुर्वेद, अध्यात्म, संस्कृति और राष्ट्र चेतना का अद्भुत संगम बनकर उभरा। कार्यक्रम ने स्पष्ट संदेश दिया कि योग केवल शारीरिक साधना नहीं, बल्कि व्यक्ति, समाज और राष्ट्र निर्माण का आधार है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने मुख्य अतिथि के रूप में की। अपने प्रेरक उद्बोधन में उन्होंने कहा कि “योग धर्म ही युग धर्म है। आज मानवता जिन चुनौतियों—तनाव, हिंसा, पर्यावरण संकट और नैतिक पतन—से जूझ रही है, उनका समाधान योग, ध्यान और संस्कारों में निहित है।” उन्होंने कहा कि योग हमें स्वयं से जोड़ता है और स्वयं से जुड़कर ही हम समाज व प्रकृति से जुड़ पाते हैं।
कार्यक्रम का आयोजन विश्वविद्यालय के कुलाधिपति स्वामी रामदेव तथा कुलपति आचार्य बालकृष्ण के कुशल नेतृत्व में सम्पन्न हुआ। उनके मार्गदर्शन में विश्वविद्यालय योग, आयुर्वेद, संस्कृत और भारतीय ज्ञान परंपरा के माध्यम से राष्ट्र के नव निर्माण की दिशा में अग्रसर है।
स्वामी रामदेव ने कहा कि यदि प्रत्येक व्यक्ति योग को जीवन में अपनाए तो परिवार स्वस्थ, समाज संस्कारित और राष्ट्र सशक्त बनेगा। वहीं आचार्य बालकृष्ण ने आयुर्वेद और स्वदेशी के माध्यम से आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को दोहराया।
कार्यक्रम में महामंडलेश्वर स्वामी हरिचेतनानन्द, साध्वी भगवती सरस्वती, केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति श्रीनिवासन जी, संगीत नाटक अकादमी की डॉ. संध्या जी तथा बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के संस्कृत आचार्य बृजभूषण जी सहित अनेक संत, विद्वान और विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे। सभी वक्ताओं ने योग, संस्कृति और शिक्षा के समन्वय को वर्तमान समय की आवश्यकता बताया।
कार्यक्रम में मंत्रोच्चारण, योग प्रदर्शन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने उपस्थित विद्यार्थियों और श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा और राष्ट्र गौरव की भावना स्पष्ट रूप से अनुभव की गई।
‘योग धर्म से युग धर्म’ की अवधारणा इस तथ्य को प्रतिपादित करती है कि जब योग जीवन का धर्म बनता है, तो वह पूरे युग की दिशा बदल देता है। यह आयोजन भारत की ऋषि परंपरा और सनातन संस्कृति के पुनर्जागरण का सशक्त संदेश बनकर सामने आया।
