पौड़ी

परमार्थ निकेतन में गूंजा सनातन स्वर, आचार्य धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का भव्य स्वागत

ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन में बुधवार को बागेश्वर पीठाधीश्वर श्रद्धेय आचार्य धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का आगमन हुआ। परमार्थ गुरुकुल के ऋषिकुमारों ने शंखध्वनि, वेदमंत्रोच्चार और पुष्पवर्षा के साथ आचार्य श्री का आत्मीय, सरल और आध्यात्मिक ऊष्मा से परिपूर्ण स्वागत किया।

इस अवसर पर परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी एवं आचार्य धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जी के मध्य हुई दिव्य भेंटवार्ता अत्यंत प्रेरक, सारगर्भित और युगबोध से परिपूर्ण रही। संवाद के दौरान सनातन धर्म की जीवंतता, युवा पीढ़ी को आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ने की आवश्यकता, राष्ट्र की सांस्कृतिक चेतना तथा सेवा को साधना बनाने के भाव पर गहन चिंतन किया गया। दोनों संतों ने कहा कि आज के समय में आध्यात्मिकता का वास्तविक अर्थ समाज के अंतिम व्यक्ति तक आशा, स्वास्थ्य, संस्कार और सम्मान पहुँचाना है।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने आचार्य धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जी को श्रीराम लला प्रतिष्ठा–2026 के पावन अवसर पर हार्दिक शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि 22 जनवरी भारत की आत्मा, अस्मिता और सनातन चेतना के पुनर्जागरण का महापर्व है। उन्होंने कहा कि श्रीराम मर्यादा, करुणा, धर्म और राष्ट्रभक्ति के शाश्वत प्रतीक हैं और श्रीराम लला प्रतिष्ठा का यह अवसर देशवासियों के जीवन में सद्भाव, एकता और नैतिक बल को और अधिक सुदृढ़ करेगा।

आचार्य धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जी ने स्वामी जी के मार्गदर्शन एवं परमार्थ निकेतन की वैश्विक सेवा-यात्रा की सराहना करते हुए कहा कि ऋषिकेश केवल योग और साधना की भूमि नहीं, बल्कि मानवता को दिशा देने वाला आध्यात्मिक प्रकाशस्तंभ है। उन्होंने स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी के जीवन को सेवा, समर्पण और संकल्प की प्रेरणा देने वाला “चलता-फिरता तीर्थ” बताया।

इस दिव्य अवसर पर आचार्य धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जी ने आगामी सामूहिक कन्या विवाह महोत्सव का पावन निमंत्रण स्वामी जी को प्रदान किया। स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि सामूहिक कन्या विवाह जैसे आयोजन सनातन संस्कृति की सामाजिक संवेदनशीलता और करुणा का जीवंत उदाहरण हैं, जो निर्धन परिवारों की बेटियों को सम्मान और सुरक्षा प्रदान करते हैं।

कार्यक्रम के दौरान स्वामी जी ने बागेश्वर धाम कैंसर अस्पताल, मेडिकल एंड साइंस रिसर्च इंस्टीट्यूट की प्रगति की जानकारी भी ली। आचार्य शास्त्री जी ने अस्पताल की वर्तमान स्थिति और भावी योजनाओं से अवगत कराया। स्वामी जी ने इसे बुन्देलखंड के लिए “सबसे बड़ा उपहार” बताते हुए कहा कि यह संस्थान आने वाले समय में लाखों लोगों के लिए आशा की किरण बनेगा। उन्होंने कहा कि जब आध्यात्मिकता और स्वास्थ्य सेवा का संगम होता है, तभी सच्चा राष्ट्रनिर्माण संभव होता है।

पूरे कार्यक्रम के दौरान परमार्थ निकेतन का वातावरण “जय श्रीराम”, “हर हर गंगे” और “भारत माता की जय” के उद्घोष से गुंजायमान रहा।

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