उत्तराखंड

उत्तराखंड की सांसद निधि यूपी में खर्च, अपने गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित

उत्तराखंड के लोगों के लिए यह खबर बेहद चिंताजनक और सवाल खड़े करने वाली है। राज्य जहां आज भी विकास की बुनियादी जरूरतों से जूझ रहा है, वहीं यहां के सांसदों की सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (MPLADS) की निधि का एक हिस्सा उत्तर प्रदेश जैसे अन्य राज्यों में खर्च किया जा रहा है।

हिन्दुस्तान अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, उत्तराखंड के कुछ सांसदों ने अपनी निधि से यूपी में स्कूल, कॉलेज, सड़क और अस्पताल जैसे कार्यों के लिए सिफारिशें की हैं। नियमों के तहत सांसद एक वित्तीय वर्ष में अधिकतम 50 लाख रुपये तक की राशि अपने निर्वाचन क्षेत्र से बाहर, दूसरे राज्यों में खर्च कर सकते हैं, लेकिन सवाल यह है कि जब उत्तराखंड के गांवों में आज भी स्कूलों की छतें टपक रही हैं, सड़कें जर्जर हैं और स्वास्थ्य सेवाएं नाकाफी हैं, तब यह धन राज्य से बाहर क्यों भेजा जा रहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक, अल्मोड़ा की सांसद ने नैनीताल में स्कूल और डिग्री कॉलेज के कार्यों के लिए सांसद निधि से धन की सिफारिश की।

कुछ सांसदों ने उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में लाखों रुपये के विकास कार्यों को मंजूरी दी।

टिहरी सांसद माला राज्यलक्ष्मी शाह ने आगरा में विकास कार्यों के लिए सांसद निधि से एक करोड़ रुपये खर्च किए।

यह वही धन है, जो उत्तराखंड के उन दूरस्थ और पर्वतीय गांवों के विकास के लिए था, जहां आज भी बिजली, पेयजल, सड़क और अस्पताल जैसी बुनियादी सुविधाएं पूरी तरह उपलब्ध नहीं हैं। हैरानी की बात यह भी है कि उत्तराखंड के सांसदों की MPLADS निधि का बड़ा हिस्सा अब तक खर्च ही नहीं हो पाया है। कई रिपोर्टों में 60 से 70 प्रतिशत तक राशि अप्रयुक्त बताई जा रही है, इसके बावजूद धन दूसरे राज्यों में भेजा जा रहा है।

इस स्थिति ने जनता के बीच कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या उत्तराखंड के सांसद राज्य के विकास को प्राथमिकता नहीं दे रहे हैं? क्या यह किसी राजनीतिक मजबूरी का नतीजा है या इसके पीछे कोई और कारण है? जब उत्तराखंड खुद विकास की राह देख रहा है, तब राज्य की जनता के हिस्से का पैसा बाहर खर्च होना जनभावनाओं के विपरीत माना जा रहा है।

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