ग्वालदम–तपोवन ऐतिहासिक लार्ड कर्जन मार्ग अब ‘नंदा–सुनंदा मार्ग’, मुख्यमंत्री धामी की घोषणा
चमोली। जनपद चमोली में कुमाऊं सीमा पर ग्वालदम से जोशीमठ के समीप तपोवन को जोड़ने वाला लगभग 200 किलोमीटर लंबा ऐतिहासिक लार्ड कर्जन मार्ग अब नंदा–सुनंदा मार्ग के नाम से जाना जाएगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को 24वें बंड विकास औद्योगिक, पर्यटन, किसान एवं सांस्कृतिक मेला 2025 के समापन अवसर पर इसकी औपचारिक घोषणा की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह निर्णय उत्तराखंड की सांस्कृतिक परंपराओं, लोक आस्था और ऐतिहासिक विरासत को सम्मान देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि मां नंदा और सुनंदा राज्य की लोक संस्कृति और जनभावनाओं से गहराई से जुड़ी हुई हैं। मार्ग का नाम परिवर्तन क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को और अधिक सशक्त करेगा।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए निरंतर प्रयासरत है। इस प्रकार के निर्णय न केवल स्थानीय जनभावनाओं का सम्मान करते हैं, बल्कि प्रदेश के पर्यटन को भी नई पहचान प्रदान करते हैं।
ऐतिहासिक महत्व और निर्माण
लार्ड कर्जन के कार्यकाल (1902) में भारत के तत्कालीन वायसराय लार्ड कर्जन उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता से अत्यधिक प्रभावित हुए थे। इसी क्रम में ग्वालदम से तपोवन तक लगभग 200 किलोमीटर लंबा पैदल मार्ग (ट्रैक) का निर्माण कराया गया। इस मार्ग का उद्देश्य यातायात सुविधा को सुदृढ़ करने के साथ-साथ क्षेत्रीय पर्यटन को बढ़ावा देना था। यह ट्रैक विशेष रूप से कुआरी पास जैसे विश्वविख्यात ट्रैकिंग मार्गों तक पहुंच के लिए जाना जाता है।
भौगोलिक स्थिति और विशेषताएं
यह मार्ग चमोली जनपद के गढ़वाल हिमालय क्षेत्र में स्थित है तथा जोशीमठ के समीप से होकर गुजरता है। इस ट्रैक से नंदा देवी, कामेट और द्रोणागिरी जैसी भव्य हिमालयी चोटियों के मनोहारी दृश्य देखने को मिलते हैं। यह मार्ग ‘कुआरी दर्रा’ और ‘लार्ड कर्जन ट्रेल’ के नाम से भी प्रसिद्ध रहा है, जिसे अब नंदा–सुनंदा परिपथ के रूप में नई पहचान दी गई है।
वर्तमान स्थिति और भविष्य की दिशा
स्वतंत्रता के बाद लंबे समय तक इस ऐतिहासिक मार्ग का अपेक्षित विकास नहीं हो सका, जिससे पर्यटकों की आवाजाही में कमी आई। अब नाम परिवर्तन के साथ उत्तराखंड सरकार इसे सांस्कृतिक विरासत, आस्था और पर्यटन विकास के प्रतीक के रूप में पुनः स्थापित करने की दिशा में कार्य कर रही है। यह मार्ग आज भी पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है और राज्य के पर्यटन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की क्षमता रखता है।
