देहरादून

मूल निवास भू कानून संघर्ष समिति का गांधी पार्क, देहरादून में एक दिवसीय धरना

सख्त भू कानून और मूल निवास की मांग फिर तेज

देहरादून: मूल निवास भू कानून संघर्ष समिति के बैनर तले आज गांधी पार्क में एक दिवसीय धरना आयोजित किया गया, जिसमें प्रदेशभर से विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों और नागरिकों ने बड़ी संख्या में भाग लेकर आंदोलन को समर्थन दिया। कार्यक्रम की शुरुआत उत्तराखंड राज्य आंदोलन के अग्रणी दिवाकर भट्ट की प्रतिमा पर पुष्पांजलि और मौन श्रद्धांजलि के साथ हुई।

समिति के संयोजक लूशुन टोडरिया ने कहा कि मूल निवास उत्तराखंडियों का जन्माधिकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में बड़ी संख्या में फर्जी स्थायी निवास प्रमाण पत्र बनाए जा रहे हैं, जिससे स्थानीय युवाओं के रोजगार अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने सरकार से मूल निवास पर स्पष्ट नीति घोषित करने, सभी नगर निकायों को भू कानून के दायरे में लाने, पर्वतीय क्षेत्रों को पाँचवीं अनुसूची में शामिल करने और मूल निवास 1950 लागू करने की मांग की।

उन्होंने चेतावनी दी कि अब यह लड़ाई सरकार से आमने-सामने लड़ी जाएगी और विधायकों की चुप्पी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने हरिद्वार से हर्षिल तक मूल निवासियों को एकजुट करने की बात कही।

आरटीआई कार्यकर्ता अनूप नौटियाल ने कृषि भूमि को व्यावसायिक भूमि में बदलने की लगातार हो रही प्रक्रिया पर गहरी चिंता व्यक्त की और कहा कि यह शहरों की कृषि संपदा के लिए गंभीर खतरा है।

समिति के प्रवक्ता हिमांशु रावत ने कहा कि मूल निवास अब मांगने का विषय नहीं, बल्कि वापस लेने का समय है। उन्होंने परेड ग्राउंड में बिरसा मुंडा नगर की तरह उत्तराखंड में इंद्रमणि बडोनी नगर, गौरा देवी नगर, श्रीदेव सुमन नगर जैसे नामों पर भी कार्य करने का सुझाव दिया।

महिला मंच की निर्मला बिष्ट ने कहा कि सरकार ने कई नगर निकायों को भू कानून से बाहर रखा है, जिससे स्पष्ट होता है कि राज्य में मजबूत भूमि कानून बनाने की मंशा नहीं है। उन्होंने जल-जंगल-जमीन बचाने की लड़ाई में सभी को एकजुट होने का आह्वान किया।

प्रमोद काला ने कहा कि मूल निवास और भू कानून उत्तराखंड की अस्मिता और भविष्य से जुड़े प्रश्न हैं। उन्होंने कहा कि आज का धरना जनता की स्पष्ट चेतावनी है कि निर्णय का समय आ गया है।

उत्तराखंड स्वाभिमान मोर्चा के उपाध्यक्ष त्रिभुवन चौहान ने कहा कि गांधी पार्क में एकजुटता दिखाती है कि मूल निवास की आवाज अब दबने वाली नहीं है। यह कानून की नहीं, अस्तित्व और पहचान की लड़ाई है।

पूर्व महापौर प्रत्याशी दिनेश चंद्र मास्टर ने आंदोलन को राज्यव्यापी समर्थन मिलने का विश्वास व्यक्त किया।

समिति के अनिल डोभाल ने कहा कि उत्तराखंड की भूमि पर उत्तराखंडियों का अधिकार सुरक्षित रखना पहला कर्तव्य है। आज का धरना आगामी बड़े आंदोलन का संकेत है।

कार्यक्रम में युवा कलाकार कनिष्क जोशी ने जनगीतों के माध्यम से लोगों को जागरूक किया।

इस धरने में हिमालय क्रांति पार्टी, बेरोजगार संघ, उत्तराखंड स्वाभिमान मोर्चा, समानता पार्टी, उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी मंच, उत्तराखंड क्रांति दल सहित अनेक संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

स्थानीय प्रतिनिधियों में अजय बिष्ट, लाल सिंह बिष्ट, बॉबी रांगड़, राम कंडवाल, सुरेश प्रीत सिंह, मनोज कोठियाल, विकास रयाल, संजय सिलस्वाल, सरिता जुयाल, मोनिका बिष्ट, नमन चंदोला, पंकज उनियाल, आशीष नौटियाल, शीशपाल पोखरियाल, सहित अनेक लोग शामिल रहे।

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