ऋषिकेश

परमार्थ निकेतन में दस दिवसीय निःशुल्क मोतियाबिंद चिकित्सा शिविर शुरू, 800 से अधिक मरीजों ने कराया पंजीकरण

ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन में आज दस दिवसीय निःशुल्क मोतियाबिंद चिकित्सा शिविर का शुभारम्भ हुआ। इसके साथ ही दो दिवसीय हृदय रोग एवं आर्थो-स्पाइन चिकित्सा जाँच शिविर का सफलतापूर्वक समापन किया गया। इस सेवा अभियान में भारत सहित अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, नेपाल आदि देशों से पधारे वरिष्ठ नेत्र एवं हृदय विशेषज्ञों ने निःस्वार्थ सेवाएँ प्रदान कीं।

कार्यक्रम का शुभारम्भ पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी एवं साध्वी भगवती सरस्वती जी के पावन सान्निध्य में दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इस शिविर में अमेरिका से डॉ. मनोज पटेल, ऑस्ट्रेलिया से डॉ. पूर्णिमा राय, इंग्लैंड से डॉ. योगा सहित भारत के प्रख्यात नेत्र विशेषज्ञ डॉ. मिलिंद भिडे, डॉ. विवेक जैन, डॉ. संपथ, डॉ. अश्विनी सुहासराव, डॉ. इरीना, डॉ. साई सुश्रुथा पेरुरी, डॉ. पारुल देसाई, डॉ. सतीश देसाई, डॉ. कलई, डॉ. आनंद चंद्रशेखरन, डॉ. विजयलक्ष्मी वद्रेवी, डॉ. भट्ट, डॉ. नीलिमा गाँधम, डॉ. जया माधुरी तथा डॉ. रोजी आहूजा सहित अनेक विशेषज्ञ चिकित्सक शामिल हुए।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि “सेवा ही सच्ची साधना है।” आँखों की रोशनी केवल दृष्टि नहीं देती, बल्कि जीवन में नया उजाला और नई दिशा भी प्रदान करती है। किसी व्यक्ति को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाना सबसे बड़ा पुण्य है। उन्होंने सभी चिकित्सकों एवं सहयोगियों के प्रति आभार जताया कि वे अपनी व्यस्तताओं के बीच मानवता की इस दिव्य सेवा में सहभागी बनते हैं।

साध्वी भगवती सरस्वती जी ने कहा कि परमार्थ निकेतन सदैव “सर्वे भवन्तु सुखिनः” के मंत्र को जीवन में उतारने का कार्य करता आया है। ऐसे स्वास्थ्य शिविर समाज के हर वर्ग के लिए अत्यंत उपयोगी हैं, विशेषकर उन लोगों के लिए जो महंगे उपचार का खर्च वहन नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि “एक स्वस्थ दृष्टि, एक स्वस्थ हृदय और एक सशक्त रीढ़ ही जीवन की असली समृद्धि है।”

इस दस दिवसीय मोतियाबिंद शिविर में दूर-दराज के क्षेत्रों से आए मरीजों के लिए निःशुल्क नेत्र परीक्षण, दवाइयाँ एवं ऑपरेशन की संपूर्ण व्यवस्था परमार्थ निकेतन द्वारा सुनिश्चित की जा रही है। वहीं हृदय रोग एवं आर्थो-स्पाइन शिविर में विशेषज्ञ डॉक्टरों ने सैकड़ों मरीजों की जाँच कर उन्हें आवश्यक परामर्श एवं उपचार दिया। विशेष रूप से वृद्धजनों में रक्तचाप एवं हृदय संबंधी समस्याएँ पाई गईं, जिनके त्वरित समाधान हेतु चिकित्सक दल सतत कार्यरत है।

इस शिविर की विशेषता यह है कि जाँच, दवा, उपचार एवं ऑपरेशन सभी सेवाएँ पूर्णतया निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही हैं। समाज के उन लोगों तक चिकित्सा सुविधा पहुँचाना जो अस्पताल नहीं पहुँच पाते, यही इस अभियान का मुख्य उद्देश्य है।

स्वामी जी ने कहा कि स्वास्थ्य, स्वच्छता और सेवा — ये तीनों जीवन और समाज की शक्ति को बढ़ाते हैं। हमें उन लोगों तक पहुँचना है जिन्हें हमारी सबसे अधिक आवश्यकता है — यही सेवा धर्म और “वसुधैव कुटुम्बकम्” की सच्ची भावना है।

स्वामी जी ने बताया कि परमार्थ निकेतन ऐसे निःस्वार्थ एवं मानवता केंद्रित अभियानों को आगे भी निरंतर जारी रखेगा। इस मोतियाबिंद चिकित्सा शिविर में अब तक 800 से अधिक मरीजों ने पंजीकरण कराया है, और सभी सेवाएँ सभी के लिए उपलब्ध हैं।

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