ऋषिकेश

परमार्थ निकेतन में सम्पन्न हुआ “सुलभ स्वच्छता पर्वतों की ओर” अभियान का फ्लैग-इन समारोह

हिमालय की पवित्रता, स्वच्छता और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश लेकर लौटी ट्रैकिंग टीम

ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन के पावन परिसर में शुक्रवार को एक ऐतिहासिक और प्रेरक कार्यक्रम आयोजित हुआ, जब हिमालय के दुर्गम क्षेत्रों में स्वच्छता और स्वास्थ्य का संदेश लेकर लौटी ट्रैकिंग टीम का फ्लैग-इन समारोह सम्पन्न हुआ। यह कार्यक्रम “सुलभ स्वच्छता पर्वतों की ओर” अभियान के अंतर्गत आयोजित किया गया, जिसका नेतृत्व पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज की पावन सन्निधि में हुआ।

समारोह के दौरान अभियान का प्रतीक आइस एक्स टीम के सदस्यों द्वारा स्वामी जी को भेंट किया गया, जो इस मिशन की सफलता, समर्पण और दृढ़ संकल्प का प्रतीक है।

अभियान का नेतृत्व और यात्रा पथ

यह अभियान ब्रिगेडियर (डॉ.) राम प्रताप सिंह के नेतृत्व में संचालित किया गया। टीम ने जोशीमठ से यात्रा आरंभ कर घांघरिया, फूलों की घाटी, हेमकुंड साहिब, बद्रीनाथ धाम, माणा गांव, भीमपुल और सरस्वती नदी जैसे पवित्र और संवेदनशील स्थलों में स्वच्छता अभियान चलाया।

अभियान के दौरान टीम ने स्थानीय ग्रामीणों को स्वच्छता, स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण के महत्व से अवगत कराया। इस प्रेरक यात्रा में राजीव रावत (टीम लीडर), अनामिका बिष्ट, प्रेम ठाकुर, सुधांशु वर्मा, लक्ष्मण डोंगरियाल और वीरेंद्र राणा जैसे समर्पित युवाओं ने सक्रिय भूमिका निभाई।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी का प्रेरक संदेश

पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने अपने संबोधन में कहा कि यह अभियान केवल स्वच्छता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हिमालय की पवित्रता, भारतीय संस्कृति और समाज सेवा का जीवंत उदाहरण है। उन्होंने कहा —

“हमें ‘यूज एंड थ्रो’ संस्कृति को छोड़कर ‘यूज एंड ग्रो’ की ओर बढ़ना होगा। अपने जीवन में ‘फोर आर’ का सिद्धांत अपनाएं — अस्वीकार करें (Refuse) अनावश्यक वस्तुएं, कम करें (Reduce) अपव्यय, पुनः उपयोग करें (Reuse) और पुनर्चक्रण (Recycle) की आदत विकसित करें।”

स्वामी जी ने कहा कि हिमालय केवल भौगोलिक नहीं, बल्कि आध्यात्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भारत की आत्मा है। यह जीवनदायिनी नदियों का स्रोत, ऋषियों की तपोभूमि और साधना की भूमि है। उन्होंने कहा कि —

“यदि हिमालय स्वस्थ रहेगा, तो भारत भी स्वस्थ और समृद्ध रहेगा।”

फ्लैग-इन सेरेमनी और सम्मान

फ्लैग-इन समारोह के दौरान टीम के सदस्यों ने विश्वविख्यात परमार्थ गंगा आरती में सहभाग किया और अपने अनुभव साझा किए। स्वामी जी ने ट्रैकिंग दल को रूद्राक्ष का पौधा भेंट करते हुए कहा कि —

“यदि संकल्प सशक्त और उद्देश्य स्पष्ट हो, तो सबसे कठिन चोटियों को भी स्वच्छता, सेवा और समाज परिवर्तन का माध्यम बनाया जा सकता है।”

संस्था और आयोजन

यह अभियान इंडियन माउंटेनियरिंग फाउंडेशन और सुलभ इंटरनेशनल सोशल सर्विस ऑर्गेनाइजेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि जब समर्पित युवा और अनुभवशील नेतृत्व मिलकर कार्य करते हैं, तो हिमालय जैसी दुर्गम भूमि में भी स्वच्छता और जागरूकता का प्रकाश फैलाया जा सकता है।

“सुलभ स्वच्छता पर्वतों की ओर” अभियान केवल एक पर्यावरणीय प्रयास नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, सामाजिक जिम्मेदारी और अध्यात्म के गहरे मूल्यों का प्रतीक बन गया है। यह अभियान यह सिद्ध करता है कि स्वच्छता केवल जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सेवा और साधना का एक मार्ग भी है।

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