आज सांय 4 बजे से संस्कृति विभाग प्रेक्षागृह, रिस्पना पुल में होगा विशेष कार्यक्रम
देहरादून। उत्तराखंड की पारंपरिक लोकसंस्कृति, हास्य-व्यंग्य और सामाजिक सरोकारों का जीवंत मिश्रण है — ‘गमत’। यह केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि पहाड़ की बोली, लोकजीवन और व्यंग्य परंपरा को सहेजने वाला सांस्कृतिक रंगमंच है।

‘गमत’ का शाब्दिक अर्थ है मनोरंजन या हंसी-ठिठोली, लेकिन इसकी आत्मा लोकजीवन से जुड़ी कहानियों, हास्य और सामाजिक संदेशों में बसती है। पुराने समय में गांवों में गमत कलाकार रातभर लोकगीतों, चुटकुलों और नाटकीय संवादों के माध्यम से समाज के मुद्दों पर कटाक्ष करते थे। यह परंपरा गांवों की चौपालों से लेकर आज शहर के मंचों तक पहुंच गई है।
इसी लोक परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए संस्कृति विभाग, उत्तराखंड द्वारा आज 11 अक्टूबर, सांय 4 बजे से संस्कृति विभाग प्रेक्षागृह, रिस्पना पुल, देहरादून में “गमत – लोक संस्कृति और हंसी-ठिठोली का संगम” शीर्षक से विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है।
इस कार्यक्रम में प्रसिद्ध गढ़वाली हास्य कलाकारों और लोक कलाकारों द्वारा हास्य नाटक, लोकगीत और पारंपरिक ‘गमत’ की झलकियां प्रस्तुत की जाएंगी। साथ ही इसमें उत्तराखंड की समृद्ध लोक बोली, पारंपरिक वेशभूषा और लोकवाद्यों की मधुर धुनों का संगम देखने को मिलेगा।
कार्यक्रम का उद्देश्य युवा पीढ़ी को गढ़वाल-कुमाऊं की लोक नाट्य परंपरा से जोड़ना और हंसी-ठिठोली के साथ सामाजिक जागरूकता का संदेश देना है।
यदि आप उत्तराखंड की लोक संस्कृति, हंसी और व्यंग्य के साथ एक शाम बिताना चाहते हैं, तो यह अवसर मिस न करें।
स्थान: संस्कृति विभाग प्रेक्षागृह, रिस्पना पुल, देहरादूनसमय:
सांय 4 बजे से
