सफलता की कहानी : ग्राम घंडियाल की गायत्री पटवाल बनीं स्वरोजगार की मिसाल
ग्रामोत्थान परियोजना से बदली जिंदगी, अब हर माह अर्जित कर रही हैं 30 से 40 हजार रुपये का लाभ
पौड़ी गढ़वाल। जनपद पौड़ी के विकासखंड कल्जीखाल के ग्राम घंडियाल की गायत्री पटवाल आज क्षेत्र की सफल उद्यमी महिला के रूप में जानी जाती हैं। कभी घर-गृहस्थी और खेती तक सीमित रही गायत्री ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दूरदर्शी नेतृत्व में संचालित ग्रामोत्थान परियोजना की सहायता से न केवल अपनी आर्थिक स्थिति सुधारी, बल्कि अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गईं।

गायत्री पटवाल राजराजेश्वरी समूह की सदस्य हैं, जो बुरांश स्वायत्त सहकारिता से जुड़ा है। अगस्त 2024 में इस सहकारिता को ग्रामोत्थान परियोजना के अंतर्गत अंगीकृत किया गया। पहले वे केवल एक गाय और खेती के सहारे परिवार का भरण-पोषण करती थीं। वर्ष 2023 में उन्होंने टेंट एवं कैटरिंग व्यवसाय शुरू किया, लेकिन संसाधनों की कमी से विस्तार नहीं कर पा रही थीं।
परियोजना के अंतर्गत व्यक्तिगत उद्यम सर्वेक्षण में चयनित होने के बाद गायत्री को 75 हजार रुपये की परियोजना सहायता राशि प्रदान की गई। इसके साथ 1 लाख रुपये का बैंक ऋण और 3 लाख 18 हजार 350 रुपये का स्वयं का अंशदान जोड़कर कुल 4 लाख 93 हजार 350 रुपये की लागत से उनका उद्यम प्रारंभ हुआ।
गायत्री बताती हैं कि आज उनके टैंट एवं कैटरिंग व्यवसाय से लगभग 1 लाख रुपये मासिक आय होती है, जिसमें से 30 से 40 हजार रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित होता है। अब उनका परिवार आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हो चुका है। उन्होंने कहा कि पहले परिस्थितियां कठिन थीं, लेकिन ग्रामोत्थान परियोजना ने उन्हें आगे बढ़ने का अवसर दिया। अब वह अन्य महिलाओं को भी स्वरोजगार के लिए प्रेरित कर रही हैं।
ग्रामोत्थान परियोजना प्रबंधक कुलदीप बिष्ट ने बताया कि शुरुआती दिनों में गायत्री को कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। लगभग 5 लाख की टेंट सामग्री खरीदने के बाद ग्राहकी कम होने से व्यापार ठप पड़ने लगा। परियोजना द्वारा दिए गए प्रशिक्षण एवं महिला समूहों के सहयोग से उन्होंने व्यवसाय का प्रचार-प्रसार किया, जिससे धीरे-धीरे बुकिंग बढ़ने लगी और व्यापार ने रफ्तार पकड़ ली।
परियोजना प्रबंधक ने कहा कि गायत्री पटवाल जैसी महिलाओं की सफलता ही ग्रामोत्थान परियोजना का वास्तविक उद्देश्य है। ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना और उन्हें आत्मनिर्भरता की दिशा में अग्रसर करना ही इस योजना का मूल लक्ष्य है। गायत्री आज अपने क्षेत्र में रोल मॉडल बन चुकी हैं।
सूचना एवं लोक संपर्क विभाग, पौड़ी गढ़वाल
