ऋषिकेश

गुरु जीवन का आलोक शिक्षक दिवस पर याद किए गए डॉ राधाकृष्णन

*गुरु केवल शब्द नहीं, जीवन का आलोक हैं : स्वामी चिदानन्द सरस्वती*

ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन में शिक्षक दिवस पर विशेष श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि आज का दिन केवल कैलेंडर की एक तारीख नहीं बल्कि अपने गुरुओं और शिक्षकों के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त करने का पावन पर्व है।

उन्होंने कहा कि भारत के पूर्व राष्ट्रपति, महान दार्शनिक एवं शिक्षाविद् भारत रत्न डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी की जयंती पर मनाया जाने वाला यह दिवस शिक्षा के महत्व और शिक्षक की भूमिका का स्मरण कराता है। डॉ. राधाकृष्णन जी ने शिक्षा को केवल जीविकोपार्जन का साधन नहीं, बल्कि आत्म-विकास और राष्ट्र-निर्माण का आधार बताया था।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु को सदा सर्वोच्च स्थान दिया गया है। गुरु जीवन के अंधकार को मिटाकर ज्ञान का दीप जलाते हैं। उन्हें ब्रह्मा, विष्णु और महेश्वर की उपाधि दी गई है क्योंकि वे सृष्टि, पालन और परिवर्तन तीनों के प्रतीक हैं।

उन्होंने कहा कि आज के प्रतिस्पर्धी और तकनीकी युग में शिक्षक की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है। शिक्षक विद्यार्थियों को केवल प्रमाणपत्र तक सीमित न रखकर जीवन की कला, धैर्य, करुणा और सेवा जैसे मूल्य सिखाते हैं।

स्वामी जी ने कहा कि राष्ट्र की प्रगति का मार्ग विद्यालयों और कक्षाओं से होकर निकलता है। यदि शिक्षक सशक्त और प्रेरणादायी होंगे तो छात्र भी नई ऊँचाइयों को छुएँगे। शिक्षक केवल पेशा नहीं बल्कि राष्ट्र-निर्माण का एक यज्ञ है।

उन्होंने अंत में कहा कि हमें उन सभी शिक्षकों को नमन करना चाहिए जो दीपक की भांति स्वयं जलकर दूसरों का जीवन आलोकित करते हैं। शिक्षा का यही दिव्य दान भविष्य का भारत गढ़ेगा।

इस अवसर पर परमार्थ निकेतन परिवार की ओर से भारत रत्न डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी को उनकी जयंती पर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई और समस्त देशवासियों को शिक्षक दिवस की शुभकामनाएँ दी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *