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धराली के पुनर्निर्माण के लिए समाज से एकजुट होने की अपील — स्वामी चिदानन्द सरस्वती

ऋषिकेश। उत्तराखंड के हिमालय की गोद में स्थित सुंदर गाँव धराली आज कठिन दौर से गुजर रहा है। कभी अपने प्राकृतिक सौंदर्य, समृद्ध संस्कृति और मेहमाननवाजी के लिए प्रसिद्ध यह गाँव अब रोटी, कपड़ा, मकान और मूलभूत सुविधाओं की कमी जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है।

परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने समाज से अपील की कि धराली का पुनर्निर्माण केवल प्रशासन की नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा — “जब हम एकजुट होते हैं, तो न केवल एक गाँव, बल्कि पूरी मानवता का भविष्य बदल सकता है।”

स्वामी जी ने बताया कि भले ही वे इस समय शारीरिक रूप से उत्तराखंड में मौजूद नहीं हैं, लेकिन उनकी भावनाएँ, चिंतन और प्रार्थनाएँ हमेशा उत्तराखंड के साथ हैं। परमार्थ निकेतन में प्रतिदिन उत्तराखंड की शांति और समृद्धि के लिए विशेष यज्ञ आयोजित हो रहे हैं तथा तीनों समय निराश्रितों और जरूरतमंदों को भोजन प्रसाद वितरित किया जा रहा है।

धराली के लोग कठिनाइयों के बावजूद अपने सपनों और संघर्षों के साथ डटे हुए हैं। स्वामी चिदानन्द ने कहा कि गाँव का पुनर्निर्माण केवल स्थानीय विकास का प्रतीक नहीं होगा, बल्कि यह पूरे देश को संदेश देगा कि एकजुटता से कोई भी चुनौती पार की जा सकती है।

उन्होंने समाज से दान, श्रमदान और तकनीकी सहयोग के रूप में योगदान देने की अपील की, ताकि धराली की खोई हुई शांति और रौनक वापस लाई जा सके।

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