देहरादून में श्रावणी उपाकर्म, संस्कृत दिवस और बटुक ब्रह्मचारियों का उपनयन सम्पन्न
टपकेश्वर महादेव मंदिर में वैदिक परंपरा के साथ हुआ आयोजन
देहरादून। उत्तराखण्डविद्वत्सभा (पंजी.) एवं संस्कृत भारती देहरादून के संयुक्त तत्वावधान में संस्कृत सप्ताह समारोह के अंतर्गत “श्रावणी उपाकर्म एवं संस्कृत दिवस” तथा बटुक ब्रह्मचारियों का उपनयन संस्कार आज तपसी तीर्थ, टपकेश्वर महादेव मंदिर, गढ़ीकैंट में सम्पन्न हुआ।

कार्यक्रम का संचालन संरक्षक डॉ. राम भूषण बिजल्वाण एवं डॉ. राम लखन गैरोला के मार्गदर्शन में हुआ। सभाध्यक्ष के रूप में सभा अध्यक्ष श्री विजेंद्र प्रसाद ममगाईं ने नेतृत्व प्रदान किया, जबकि महासचिव श्री दिनेश भट्ट, प्रवक्ता श्री मुकेश पंत सहित अन्य पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे।
आचार्य श्री मंत्री प्रसाद थपलियाल के आचार्यत्व में वैदिक विधानानुसार श्रावणी उपाकर्म सम्पन्न हुआ। इसमें गणपत्यादि देवताओं का पूजन, दशविधि स्नान, तर्पण, मध्याह्न संध्या, ऋषि पूजन, प्रणवादि देवता प्रतिष्ठा और यज्ञानुष्ठान शामिल थे।
इस अवसर पर अनेक बटुक ब्रह्मचारियों का उपनयन संस्कार सम्पन्न कराया गया। यज्ञोपवीत धारण के पश्चात उन्हें वेदाध्ययन की दीक्षा दी गई। आचार्यों ने इस संस्कार के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उपनयन संस्कार जीवन में वैदिक अध्ययन, अनुशासन और आध्यात्मिक उन्नति का प्रवेश द्वार है।

संस्कृत भारती के पूर्णकालिक कार्यकर्ता श्री विशालप्रसाद भट्ट ने संस्कृत दिवस के महत्व पर प्रेरणादायी वक्तव्य दिया और संस्कृत के उद्घोष वाक्यों के माध्यम से उपस्थित जनों में उत्साह का संचार किया। कार्यक्रम में विविध सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी हुईं।
टपकेश्वर महादेव मंदिर समिति के पदाधिकारी, सभा के सदस्य, संस्कृत भारती कार्यकर्ता, वैदिक धर्मावलंबी और संस्कृत-प्रेमी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। पूरे स्थल पर वेद मंत्रों की गूंज, हवन की सुगंध और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का पावन वातावरण छाया रहा।
आयोजकों ने सभी विद्वानों, आचार्यों, ब्रह्मचारियों और श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त करते हुए संस्कृत भाषा और भारतीय संस्कृति के संवर्धन का संकल्प दोहराया।
