उत्तराखंडद्वारीखालपौड़ी

बाघ का कहर: बकरियां चराने गई महिला पर हमला, मौत

ग्रामीणों में आक्रोश, बाघ की शूटआउट की मांग, क्षेत्र में वन्यजीव सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की उठी आवाज

द्वारीखाल। जनपद पौड़ी के द्वारीखाल ब्लॉक के ग्राम हलसी, जवाड़  में बाघ का आतंक एक बार फिर देखने को मिला। गांव की 35 वर्षीय महिला लता देवी पत्नी जयवीर सिंह पर उस समय बाघ ने हमला कर दिया जब वह रोज की तरह अपनी बकरियों को लेकर जंगल की ओर गई थी। महिला पर यह हमला अचानक हुआ, जिससे वह बच नहीं सकी।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, लता देवी जैसे ही कुछ दूर जंगल में पहुंचीं, झाड़ियों में छिपे बैठे बाघ ने उन पर झपट्टा मार दिया। उनके चिल्लाने की आवाज सुनकर परिजन और गांववाले मौके की ओर दौड़े। घटनास्थल के पास खून के धब्बे और अन्य सामान मिला। कुछ दूरी पर लता देवी का क्षत-विक्षत शव बरामद हुआ।

घटना से पूरे क्षेत्र में दहशत और आक्रोश का माहौल है। ग्रामीणों ने वन विभाग और प्रशासन से बाघ को शूटआउट करने की मांग की है। साथ ही, उन्होंने जंगल क्षेत्र में गश्त बढ़ाने, ट्रैप कैमरे लगाने और वन्यजीव अलर्ट सिस्टम स्थापित करने की मांग उठाई है।

ग्रामीणों ने मांग की है कि आदमखोर बाघ को शूट आउट किया जाए, जंगल में सघन गश्त, ट्रैप कैमरे, वन्यजीव अलर्ट सिस्टम लगाया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि जंगली जानवरों का भय अब आमजन के जीवन पर सीधा असर डाल रहा है। महिलाएं, बच्चे और वृद्ध जंगल की ओर जाने से डरने लगे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि, वन्यजीवों के प्राकृतिक आवासों में मानवीय हस्तक्षेप, जंगलों में लगने वाली आग और हिरण, काकड़ जैसे वन्यजीवों की घटती संख्या बाघों के व्यवहार में बदलाव का कारण बन रही है। शिकार की कमी के कारण बाघ अब इंसानों पर हमले करने लगे हैं।

लता देवी की दुखद मृत्यु ने एक बार फिर क्षेत्र में मानव-वन्यजीव संघर्ष की गंभीरता को उजागर कर दिया है। ग्रामीण प्रशासन से त्वरित और ठोस कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

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