गाय के गोबर से संवर रही चमराड़ा की 450 महिलाओं की आजीविका, सात लाख का कारोबार
धूप, हवन कप, दीपक और देवी-देवताओं की मूर्तियां बनाकर महिलाएं बन रहीं आत्मनिर्भर, कई शहरों में बढ़ रही उत्पादों की मांग
पौड़ी। ग्रामीण महिलाओं ने अपनी मेहनत और हुनर से गाय के गोबर को कमाई का जरिया बना दिया है। विकासखंड खिर्सू के चमराड़ा में ग्रामोत्थान परियोजना के सहयोग से 450 महिलाएं गोबर से विभिन्न उपयोगी और सजावटी उत्पाद तैयार कर आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिख रही हैं। इस पहल के तहत अब तक करीब सात लाख रुपये का कारोबार किया जा चुका है।

चमराड़ा क्लस्टर के अंतर्गत 25 गांवों के 15 ग्राम संगठनों से जुड़ी महिलाएं गाय के गोबर से धूप, हवन कप, दीपक और देवी-देवताओं की मूर्तियां तैयार कर रही हैं। इन उत्पादों की मांग पौड़ी, श्रीनगर, कोटद्वार, देहरादून और हरिद्वार सहित विभिन्न शहरों में बढ़ रही है।
भूमि स्वायत्त सहकारिता द्वारा ग्रामीण महिलाओं से 20 रुपये प्रति किलो की दर से गोबर खरीदा जा रहा है। इससे महिलाओं को घर के आसपास उपलब्ध संसाधनों से अतिरिक्त आमदनी हो रही है। सहकारिता के बिजनेस प्रमोटर दीपक शाह के अनुसार, इकाई की स्थापना से अब तक लगभग सात लाख रुपये का कारोबार हो चुका है।
ग्रामोत्थान परियोजना के प्रबंधक कुलदीप बिष्ट ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य स्थानीय संसाधनों के उपयोग से महिलाओं को स्थायी आजीविका उपलब्ध कराना और उनके उत्पादों को बाजार से जोड़ना है। परियोजना की ओर से छह लाख रुपये की सहायता दी गई है, जबकि फेडरेशन ने तीन लाख रुपये का बैंक ऋण लेकर उद्यम को आगे बढ़ाया है।
दीपावली के अवसर पर गोबर से बने धूप, हवन कप और दीपकों की मांग में विशेष बढ़ोतरी हुई है। वर्तमान में विभिन्न संस्थानों और विक्रय केंद्रों से 1.41 लाख रुपये के उत्पादों की मांग प्राप्त हुई है। इनमें कृष्णायन गौ सेवा संस्थान हरिद्वार, अंजलि स्टोर श्रीनगर, कीर्तिनगर ब्लॉक एनआरएलएम, हिलांस आउटलेट, क्वालिटी बास्केट श्रीकोट और नाबार्ड आधार सेंटर हिंडोला खाल सहित अन्य केंद्र शामिल हैं।
चमराड़ा की महिलाओं की यह पहल स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग, सामूहिक प्रयास और स्वरोजगार का प्रेरणादायक उदाहरण बन रही है। गोबर से तैयार उत्पादों के जरिए महिलाएं न केवल अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा दे रही हैं।

