श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर भजनों से गूंजा कथा पंडाल, आचार्य शिवराम भट्ट को मिला प्रथम ‘आसाराम व्यास स्मृति सम्मान’
ऋषिकेश में संतों ने स्व. आसाराम व्यास को दी श्रद्धांजलि, धर्म और संस्कृति के क्षेत्र में उनके योगदान को किया याद
ऋषिकेश। स्वर्गीय आसाराम व्यास की पावन स्मृति में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के चतुर्थ दिवस पर मनु-शतरूपा प्रसंग के साथ भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया। इस दौरान कथा पंडाल ‘नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की’ के जयकारों से गूंज उठा। कथा व्यास आचार्य शिवराम भट्ट के मधुर प्रवचनों ने श्रद्धालुओं को भगवान की दिव्य लीलाओं से भावविभोर कर दिया। इस अवसर पर पूज्य संतों का सानिध्य प्राप्त हुआ, वहीं स्व. आसाराम व्यास की स्मृति में सम्मान समारोह का भी आयोजन किया गया।

कथा के दौरान आचार्य शिवराम भट्ट ने स्वायंभुव मनु एवं शतरूपा की तपस्या, उनके वंश वर्णन और विभिन्न धार्मिक प्रसंगों का विस्तार से वर्णन किया। इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य प्राकट्य और जन्म की कथा सुनाई गई। वासुदेव जी द्वारा बाल स्वरूप श्रीकृष्ण को गोकुल पहुंचाने और नंद भवन में जन्मोत्सव मनाए जाने के प्रसंग पर श्रद्धालु भक्ति में लीन हो गए। पंडाल में बधाई गीतों, ढोल-नगाड़ों और श्रद्धालुओं के नृत्य से उत्सव का माहौल बन गया।
संतों ने स्व. आसाराम व्यास को दी श्रद्धांजलि
कथा स्थल पर महामंडलेश्वर दयाराम दास महाराज, संत महामंडलेश्वर ईश्वरदास महाराज, केशव स्वरूप महाराज, परमानंद दास महाराज, मनोज प्रपन्नाचार्य महाराज, महंत जगदीश प्रपन्नाचार्य और महंत रवि प्रपन्नाचार्य सहित अनेक संतों का सानिध्य प्राप्त हुआ। संतों ने स्व. आसाराम व्यास को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए धर्म, संस्कृति और समाज के प्रति उनके योगदान को याद किया।
आचार्य शिवराम भट्ट को मिला प्रथम स्मृति सम्मान
इस अवसर पर स्व. आसाराम व्यास द्वारा स्थापित गढ़ भूमि लोक संस्कृति संरक्षण समिति, ढालवाला की ओर से ‘स्व. आसाराम व्यास स्मृति सम्मान’ का शुभारंभ किया गया। प्रथम सम्मान कथा व्यास आचार्य शिवराम भट्ट को सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार और विस्तार में उनके योगदान के लिए प्रदान किया गया।
कार्यक्रम में संस्था के अध्यक्ष गजेंद्र सिंह कंडियाल, सचिव विशालमणि पैन्यूली, घनश्याम नौटियाल, सुरेंद्र सिंह भंडारी, धनीराम बिंजोला, रमावल्लभ भट्ट और महिपाल बिष्ट सहित अनेक पदाधिकारी उपस्थित रहे।
इस दौरान आचार्य शिवराम भट्ट ने कहा कि भगवान की कथा केवल सुनने का विषय नहीं, बल्कि जीवन को संवारने का दिव्य मार्ग है। संतों और गणमान्य व्यक्तियों का मिलन समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।
कार्यक्रम में विभिन्न सामाजिक, शैक्षणिक, धार्मिक और साहित्यिक संस्थाओं से जुड़े प्रतिनिधियों सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। संतों के सानिध्य और श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के उल्लास से कथा स्थल भक्तिमय वातावरण में सराबोर रहा।

