उक्रांद ने संविधान संशोधन के लिए बनाई 15 सदस्यीय समिति, डॉ. शक्तिशैल कपरवाण को मिली कमान
देहरादून। उत्तराखंड क्रांति दल (उक्रांद) ने संगठन को मजबूत बनाने और पार्टी के संविधान को वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप ढालने की दिशा में पहल की है। केंद्रीय अध्यक्ष सुरेन्द्र कुकरेती के निर्देश पर 15 सदस्यीय संविधान संशोधन समिति का गठन किया गया है। डॉ. शक्तिशैल कपरवाण को समिति का अध्यक्ष मनोनीत किया गया है।

समिति का उद्देश्य पार्टी के संविधान में आवश्यक संशोधन कर संगठन में पारदर्शिता, जवाबदेही और व्यापक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना है। समिति की पहली बैठक जल्द आयोजित की जाएगी, जिसमें सदस्य अपने अनुभव और लिखित सुझाव प्रस्तुत करेंगे। इन सुझावों के आधार पर संविधान संशोधन से जुड़े प्रस्तावों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।
संविधान संशोधन के प्रस्तावों में पार्टी की विचारधारा को व्यावहारिक राजनीति से जोड़ने, बूथ स्तर तक संगठन का विस्तार करने और संगठनात्मक ढांचे को मजबूत बनाने पर जोर दिया गया है। इसके साथ ही पदाधिकारियों के लिए अनिवार्य प्रशिक्षण प्रमाणपत्र, भौगोलिक एवं जनसंख्या के आधार पर सांगठनिक क्षेत्र निर्धारित करने तथा मीडिया, प्रचार-प्रसार और संसदीय कार्यों सहित विभिन्न क्षेत्रों के लिए अलग-अलग संगठनात्मक इकाइयां गठित करने जैसे बिंदु शामिल हैं।
पार्टी में पारदर्शी चुनाव प्रक्रिया लागू करने, वरिष्ठ एवं अनुशासित नेतृत्व को प्राथमिकता देने और अध्यक्ष पद के लिए संवाद क्षमता, ईमानदारी, दूरदर्शिता, जवाबदेही तथा निर्णय लेने की क्षमता जैसे गुणों को निर्धारित करने पर भी विचार किया जाएगा।
समिति में राज्य आंदोलनकारी एवं वरिष्ठ उक्रांद नेत्री गीता बिष्ट, रविन्द्र वशिष्ठ, सलीम अहमद, दिनेश भट्ट, पत्रकार देवेन्द्र चमोली, सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता राकेश बिन्जोला, हाईकोर्ट के अधिवक्ता दिनेश नेगी, शिक्षाविद् गोविन्द सिंह रावत, किसान आंदोलन के प्रतिनिधि एवं व्यापार मंडल अध्यक्ष राकेश चौहान, पूर्व सैनिक देव चन्द उत्तराखण्डी, मुख्य मीडिया प्रभारी अनिल थपलियाल, नौसेना से सेवानिवृत्त शिव सिंह रावत और उत्तराखंड विद्युत निगम के सेवानिवृत्त अधिकारी एवं पर्यावरण कार्यकर्ता महेन्द्र सिंह को शामिल किया गया है। वाचस्पति भट्ट ‘सलाणी’ को समिति का पदेन सचिव बनाया गया है।
समिति में राज्य आंदोलनकारियों, अधिवक्ताओं, शिक्षाविदों, पत्रकारों, पूर्व सैनिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को प्रतिनिधित्व दिया गया है। दल नेतृत्व को उम्मीद है कि समिति के सुझावों से संगठनात्मक व्यवस्था अधिक प्रभावी होगी और पार्टी की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता तथा अनुशासन को मजबूती मिलेगी।

