परमार्थ निकेतन में माँ शबरी रामलीला से दिया सामाजिक समरसता का संदेश
ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन में माँ गंगा के पावन तट पर आयोजित माँ शबरी रामलीला भक्ति, भारतीय संस्कृति और सामाजिक समरसता का संदेश दे रही है। रामलीला के माध्यम से जनजातीय एवं आदिवासी कलाकारों ने अपनी सांस्कृतिक विरासत और प्रतिभा का प्रदर्शन किया। इस अवसर पर संतों ने कलाकारों को आशीर्वाद प्रदान कर उनका उत्साहवर्धन किया।

कार्यक्रम में परमार्थ पीठाधीश्वर स्वामी चिदानन्द सरस्वती, स्वामी दयाराम दास, स्वामी कृष्णाचार्य, स्वामी ईश्वरदास एवं महंत रवि शास्त्री का सान्निध्य प्राप्त हुआ। संतों ने माँ शबरी की अनन्य भक्ति का उल्लेख करते हुए प्रेम, समानता, समर्पण और मानवीय संवेदना को भारतीय संस्कृति का मूल आधार बताया।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि भारतीय संस्कृति की वास्तविक शक्ति विविधता में एकता, करुणा और समरसता में निहित है। माँ शबरी रामलीला जनजातीय एवं आदिवासी समुदायों की कला, परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को व्यापक पहचान देने का महत्वपूर्ण माध्यम है। संस्कृति का संरक्षण तभी सार्थक है, जब उसे जीवंत रखने वाले समुदायों को सम्मान और समान अवसर प्राप्त हों।
इस अवसर पर गुजरात में परमार्थ निराश्रित आश्रम के निर्माण तथा वृद्धजनों एवं निराश्रितजनों की सेवा में सहयोग के लिए शिकागो से पहुंचे विक्रम शाह एवं वेनीता शाह का अभिनंदन किया गया। उनके सहयोग को सेवा, करुणा और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना का प्रतीक बताया गया।
कार्यक्रम में माँ शबरी रामलीला से जुड़े शक्ति बख्शी, विश्व मोहन, मनोज त्यागी, सुमित कुमार, जितेंद्र चौरसिया एवं डॉ. मुकेश कुमार सहित अन्य सहयोगियों की भूमिका की सराहना की गई। उत्कृष्ट प्रस्तुतियों के लिए कलाकार राहुल, हितेश, चंचल, राहुल परिहार एवं हरमीत सिंह, निदेशक डॉ. अनु, चारू सिंह और उपनिदेशक प्रवीण सहित पूरी टीम का अभिनंदन किया गया।
माँ शबरी रामलीला के माध्यम से प्रभु श्रीराम के आदर्शों, जनजातीय संस्कृति के सम्मान और समाज में प्रेम, समानता एवं समरसता को बढ़ावा देने का संदेश दिया गया।

