ऋषिकेश

परमार्थ निकेतन में योग टीचर ट्रेनिंग के नए बैच का शुभारंभ

देश-विदेश से पहुंचे साधकों ने योग, ध्यान, प्राणायाम और भारतीय जीवन-दर्शन से जुड़ने का लिया संकल्प

ऋषिकेश। पावन गंगा तट स्थित परमार्थ निकेतन में सोमवार को योग टीचर ट्रेनिंग कोर्स के नए बैच का शुभारंभ परमार्थ पीठाधीश्वर पूज्य स्वामी चिदानंद सरस्वती और डॉ. साध्वी भगवती सरस्वती के सान्निध्य में हुआ। इस प्रशिक्षण में देश-विदेश से पहुंचे योग साधक योग, ध्यान, प्राणायाम के साथ भारतीय जीवन-दर्शन एवं आध्यात्मिक परंपराओं का अध्ययन करेंगे।

इस अवसर पर स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि भारत केवल योग सीखने की भूमि नहीं, बल्कि योग को जीने की भूमि है। उन्होंने कहा कि भारत से योग का ज्ञान लेकर लौटने वाले साधकों के जीवन में आसन और प्राणायाम के साथ सनातन जीवन-दृष्टि, करुणा, सेवा, शांति, प्रकृति के प्रति सम्मान और ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ का भाव भी होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि योग केवल शरीर को मोड़ने या आसनों के अभ्यास तक सीमित नहीं है। योग व्यक्ति को स्वयं से, प्रकृति से और समस्त सृष्टि से जोड़ने का मार्ग दिखाता है। भारत ने योग को मानवता के कल्याण के लिए समर्पित किया है और ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ की भावना के साथ इसकी ज्ञान-परंपरा को आगे बढ़ाया जाना चाहिए।

डॉ. साध्वी भगवती सरस्वती ने कहा कि योग व्यक्ति को स्वयं के साथ गहरे संबंध की ओर ले जाता है। योग की यात्रा बाहर से भीतर और भीतर से पूरे अस्तित्व की ओर जाने वाली यात्रा है। उन्होंने कहा कि भारत आने वाले साधकों के लिए यह केवल योग सीखने का अवसर नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक जीवन-पद्धति को समझने का अनुभव भी है।

प्रशिक्षण के दौरान साधक योगासन, प्राणायाम, ध्यान, योग दर्शन, शरीर-विज्ञान और शिक्षण पद्धतियों का अध्ययन करेंगे। इसके साथ ही गंगा आरती, यज्ञ, प्रार्थना, ध्यान, सत्संग, सेवा और प्रकृति के सान्निध्य के माध्यम से योग को जीवन-पद्धति के रूप में समझने का प्रयास किया जाएगा।

योग टीचर ट्रेनिंग कोर्स में साध्वी आभा सरस्वती, गंगा नंदिनी, डॉ. इंदु शर्मा, योगाचार्य गायत्री, आचार्य मयंक, डॉ. राठौर, डॉ. श्री एवं श्रीमती लेले तथा डॉ. गेरी सहित विशेषज्ञ प्रशिक्षण दे रहे हैं। प्रशिक्षण में अमेरिका, चेक गणराज्य, ग्वाटेमाला, स्वीडन, मेक्सिको, नेपाल, आयरलैंड और भारत सहित विभिन्न देशों के योग साधक शामिल हैं।

शहीद भगत सिंह को गंगा आरती समर्पित

कार्यक्रम के दौरान शहीद भगत सिंह की जयंती पर परमार्थ निकेतन की गंगा आरती उन्हें समर्पित की गई। स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि भगत सिंह ने अदम्य साहस और शौर्य के साथ स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा दी। राष्ट्र के सम्मान के लिए सर्वस्व न्योछावर करने का उनका जज्बा युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है।

इसके साथ ही भारत रत्न एवं कृषि वैज्ञानिक डॉ. एम. एस. स्वामीनाथन की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। वहीं भारत रत्न लता मंगेशकर की जयंती पर भी उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए स्वामी जी ने कहा कि उनका स्वर भारतीय संगीत की आत्मा बनकर सदैव गूंजता रहेगा। उनके सुरों ने भारतीय संगीत जगत को समृद्ध किया और उनकी आवाज संगीत प्रेमियों के हृदय में हमेशा बनी रहेगी।

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